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बजट में कैसे करें देश के सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक हिमाचल के चंबा का सफर

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चंपावती...चंपा...और अब चंबा. हिमाचल प्रदेश में रावी नदी के किनारे 996 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की घाटी में बसा यह इलाका एक स्वर्ग ही है। जम्मू-कश्मीर से सटे हिमाचल के इस इलाके में प्रकृति ने जमकर खूबसूरती बिखेरी है। मंदिरों से भरा यह क्षेत्र झीलों, सुंदर झरनों, बर्फ से ढके पर्वत और हरे-भरे जंगलों के कारण किसी जन्नत से कम नहीं है।

मन को असीम शांति प्रदान करता है नालंदा, राजगीर स्थित विश्व शांति स्तूप

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बिहार में नालंदा जिले के राजगीर में है विश्व शांति स्तूप। राजगीर में वैसे तो कई पर्यटक और तीर्थ स्थल है, लेकिन यहां का प्रमुख आकर्षण है यह विश्व शांति स्तूप। यह स्तूप 400 मीटर ऊंची रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित है। संगमरमर के पत्थरों से बने इस विश्व शांति स्तूप में भगवान बुद्ध की चार स्वर्ण प्रतिमाएं है। ये चार स्वर्ण प्रतिमाएं जीवन के चार चरणों जन्म, ज्ञान, उपदेश और मृत्यु को दर्शाती है।

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

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वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

बिहार के वैशाली में है दुनिया की सबसे पुरानी संसद: राजा विशाल का गढ़

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आज जो हम हर बात में प्रजातंत्र और लोकतंत्र की बात करते हैं उसे सबसे पहले दुनिया को बिहार ने दिया था। बिहार के वैशाली को दुनिया में पहला गणराज्य माना जाता है।  वैशाली का लिच्छवी गणराज्य विश्व का प्रथम गणतंत्र माना जाता है। यह आठ छोटे-छोटे राज्यों का संघ था और यहां सारे बड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते थे।  ईसा पूर्व 6-7 सौ साल पहले वैशाली लिच्छवी गणराज्य की राजधानी थी।

अशोक स्तंभ वैशाली: जानिए जैन धर्म का यह जन्मस्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए क्यों है खास

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वैशाली यानी दुनिया का पहला गणराज्य। वैशाली यानी जिसने विश्व को लोकतंत्र दिया। महाभारत युग के राजा विशाल के नाम पर बना यह वैशाली भगवान महावीर की जन्मभूमि भी है। यानी जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर का जन्म बासोकुंड, वैशाली में ही हुआ था। लेकिन यह सिर्फ जैन धर्म के लिए ही पवित्र स्थल नहीं है, बल्कि वैशाली एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल भी है। यहां हर साल चीन, जापान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, कनाडा के साथ दुनिया भर से लाखों पर्यटक आते हैं।

माता मुंडेश्वरी मंदिर: दुनिया का सबसे प्राचीन मंदिर, जहां बलि के बाद भी जिंदा रहते हैं बकरे

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भारत में पूजा-अर्चना के लिए एक से बढ़कर एक मंदिर हैं। लेकिन मान्यता है कि देश में माता का सबसे प्राचीन मंदिर बिहार के कैमूर जिले में है। माता का यह मंदिर है- मुंडेश्वरी मंदिर। यह मंदिर शिव और शक्ति को समर्पित है। यह मंदिर देश-दुनिया में अपनी महिमा और मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के पूर्व में माता मुंडेश्वरी की एक दिव्य और भव्य प्रतिमा है। माता की पत्थर की मूर्ति वाराही रूप में है। माता के इस रूप का वाहन महिष है।

केसरिया में है दुनिया का सबसे बड़ा स्‍तूप, भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण से पहले किया था रात्रि विश्राम

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सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लिए बिहार सबसे पवित्र स्थल है। बिहार में बौद्ध धर्म के कई पवित्र स्थलों में से एक है केसरिया का बौद्ध स्तूप। बताया जाता है कि भगवान बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व में कुशीनगर में महापरिनिर्वाण लेने से पहले एक रात केसरिया में बिताई थी। बताया जाता है कि वैशाली से कुशीनगर जाते वक्त केसरिया में विश्राम के दौरान उन्होंने अपना भिक्षा पात्र लिच्छविओं को सौंप दिया था।

कुशीनगर: यहां भगवान बुद्ध ने प्राप्त किया था महापरिनिर्वाण

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उत्तर प्रदेश में कुशीनगर बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह भगवान बुद्ध के चार पवित्र स्थानों में से एक है। बताया जाता है कि भगवान बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व में कुशीनगर में ही आखिरी सांस ली थी यानी महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया था। यहां रामाभार स्तूप में उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

देवघर बाबाधाम में लगता है दुनिया का सबसे लंबा धार्मिक मेला

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इस बार 25 जुलाई रविवार से सावन का पावन महीना शुरू हो रहा है, जो 22 अगस्त रविवार तक रहेगा। सावन का नाम आते ही दिमाग में बाबा भोलेनाथ के कांवड यात्रा की बात घूमने लगती है। हर साल सावन के महीने में लोग कांवड़ लेकर बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने बाबाधाम जाते हैं। करीब एक महीने के दौरान (इस बार सिर्फ 29 दिन) हर दिन लाखों लोग भोले बाबा को गंगा जल अर्पण करते हैं। वैसे तो यहां सालों भर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सावन के महीने का विशेष महत्व है।

जल मंदिर पावापुरी: भगवान महावीर का निर्वाण स्थल, जहां उन्होंने दिया था पहला और अंतिम उपदेश

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जल मंदिर पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। भगवान महावीर को इसी स्थल पर मोक्ष यानी निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। जैन धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र शहर है। बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास पावापुरी में यह जल मंदिर है। यह वही जगह है जहां भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला और आखिरी उपदेश दिया था। भगवान महावीर ने इसी जगह से विश्व को अहिंसा के साथ जिओ और जीने दो का संदेश दिया था।

बुद्ध स्मृति पार्क: पटना का सबसे लोकप्रिय उद्यान, जहां रोज आते हैं हजारों पर्यटक

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बुद्ध स्मृति पार्क काफी जल्दी ही पटना का सबसे लोकप्रिय पर्यटक स्थल बन गया है। पटना के लोगों के साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पटना जंक्शन के पास होने के कारण पटना आने वाले तकरीबन सभी लोग यहां जरूर आते हैं। पटना का यह पार्क अब दुनियाभर के बौद्ध पर्यटकों के लिए आस्था का केंद्र बन गया है।

श्री हरिमंदिर जी साहिब: सिख धर्म का दूसरा प्रमुख तख्त है पटना साहिब

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बिहार की राजधानी पटना में स्थित है सिख धर्म का दूसरा सबसे प्रमुख तख्त श्री हरिमंदिर जी साहिब। यह सिखों के दसवें और आखिरी गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है। गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसम्बर 1666 को पटना में सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी और माता गुजरी के घर हुआ था। उनके बचपन का नाम गोबिन्द राय था। जिस घर में उनका जन्म हुआ था, आज वहीं तख्त श्री हरिमंदिर जी साहिब है।

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

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मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

गया विष्णुपद मंदिर: जानिए क्या है खास मान्यता और इसका पितरों से क्या है संबंध

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करीब 30 साल पहले जब गया गया था, तो इस शहर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उस समय घूम-फिर कर घर आ गया। गया से ज्यादा समय यहां के करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोधगया घूमने में गुजरा था। तीन दिन यहां रहने के दौरान जब गया के बारे में और जानकारी मिली, तब पता चला कि क्यों हिंदू धर्म में इस शहर की इतनी मान्यता है।

प्रयागराज: ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद यहीं किया था प्रथम यज्ञ

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गंगा, यमुना और सरस्वती तीन नदियों के संगम पर स्थित है प्रयागराज। संगम स्थल को त्रिवेणी कहा जाता है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र और लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ यहीं किया था। इसी 'प्रथम यज्ञ' के प्र और यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना है। देश के ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरों में से एक प्रयागराज में हर बारह वर्ष में कुंभ मेला और हर छह साल में अर्द्धकुंभ लगता है।

दिल्ली के 7 सबसे लोकप्रिय मंदिर, जहां श्रद्धालुओं की ही नहीं पर्यटकों की भी लगी रहती है भीड़

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दिल्ली देश की राजधानी है। यहां दुनिया के तमाम देशों के दूतावास और उच्चायोग हैं। यहां कई पर्यटक स्थल हैं। लाल किला, कुतुब मीनार, जंतर-मंतर, इंडिया गेट जैसे दर्शनीय स्थल हैं। दिल्ली में मुगल गार्डन, लोधी गार्डन और गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज जैसे कई उद्यान हैं। यहां दुनिया भर से पर्यटक घूमने आते हैं।

बेहद भव्य और शानदार है दिल्ली-एनसीआर का पहला इस्कॉन मंदिर

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दिल्ली-एनसीआर में बना पहला इस्कॉन मंदिर ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में है। इसे श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर के नाम से भी जानते हैं। यह खूबसूरत लोटस टैंपल और कालकाजी मंदिर के पास है। इस मंदिर की वास्तुकला शानदार है। इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। यहां आकर घंटों बैठकर राधा-कृष्णा की मूर्ति को निहारते रहने का मन करता है।

झंडेवाला मंदिर: जानिए कैसे पड़ा इस मंदिर का नाम और क्या है इसका ऐतिहासिक महत्व

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दिल्ली में करोलबाग के पास एक प्राचीन मंदिर है झंडेवाला मंदिर। यह मंदिर दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस से भी सिर्फ तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झंडेवाला मंदिर जहां है वह इलाका झंडेवाला के नाम से ही मशहूर हो गया है। यह सिर्फ दिल्ली ही नहीं देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है। झंडेवाला मंदिर झंडेवाली देवी को समर्पित एक सिद्धपीठ है। इस मंदिर का धाार्मिक ही नही ऐतिहासिक महत्व भी है।

कालकाजी मंदिर: यहां प्रकट हुई थीं मां महाकाली

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दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास माता कालका को समर्पित श्री कालकाजी मंदिर है। श्री कालकाजी मंदिर के कारण यह इलाका कालकाजी के नाम से दुनिया भर में फेमस है। यह मंदिर दिल्ली के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। माता कालका मां काली देवी की अवतार हैं। श्री कालकाजी मंदिर को जयंती पीठ या मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहते हैं। मान्यता  है कि यहां भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

आद्या कात्यायिनी छतरपुर मंदिर, दिल्ली

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दिल्ली के छतरपुर इलाके में स्थित है आद्या कात्यायिनी मंदिर। छतरपुर इलाके में होने का कारण लोग इसे छतरपुर मंदिर भी कहते हैं। देवी दुर्गा के छठे स्‍वरूप माता कात्यायनी को समर्पित यह मंदिर देश का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। करीब 70 एकड़ में फैला यह मंदिर बेहद खूबसूरत है। संगमरमर निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला, नक्‍काशी अपने आप में बेजोड़ है। बताया जाता है कि इसमें वास्तुकला की द्रविड़ और नागर शैलियों का प्रयोग हुआ है।