Skip to main content

लोगों के लिए खुला स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, यहां पहुंचते हैं सबसे ज्यादा पर्यटक

गुजरात के केवड़िया स्थित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। कोरोना संकट काल में महामारी और कम पर्यटक आने के लिए इसे बंद कर दिया गया था। अब कोरोना की स्थिति में सुधार होने के बाद इसे फिर से खोल दिया गया है। पहले दिन यहां 300 पर्यटक पहुंचे। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करना जरूरी होगा। लोगों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के साथ ही यहां सरदार सरोवर बांध, ऐतिहासिक शूलपणेश्वर अभ्यारण्य और मंदिर, जंगल सफारी पार्क, चिल्ड्रन पार्क, वैली ऑफ फ्लावर और टेंट सिटी लोगों के लिए खोल दिए गए हैं। पर्यटकों के फिर से आने के कारण यहां के लोग काफी खुश हैं।  स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के बंद होने का असर यहां के लोगों के रोजगार पर पड़ा था। अब यहां होटल, टैक्सी, हस्तशिल्प, फूल और गिफ्ट का कारोबार करने वाले लोगों में खुशी की लहर है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ऊंचाई 182 मीटर है। इसके ग्राउंड फ्लोर पर एक विशाल प्रदर्शनी कक्ष का निर्माण किया गया है। यह कक्ष 4,647 वर्ग मीटर क्षेत्र मे फैला हुआ है। यह कक्ष सरदार पटेल के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को दर्शाता है। देश के करीब 169,058 गांवों से मिट्टी लाकर 36 फीट गुना 12 फीट की एक दीवार वॉल ऑफ यूनिटी बनाई गई है। यह दीवार देश की विविधता मे एकता का प्रतिनिधित्व करती है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के कुशल राजनीतिज्ञ और एकता के आदर्शों का भी प्रतीक है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार सरोवर बांध से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नर्मदा नदी के साधुबेट पर स्थित यह स्मारक की दुनिया के प्रमुख पर्यटक केंद्रों में एक है। यहां पर्यटकों के लिए रहने, खाने-पीने के साथ परिवहन सेवा और हेल्थ से जुड़ी हाई क्वालिटी की सुविधाएं उपलब्ध है।

कैसे पहुंचे-
गुजरात के सभी प्रमुख शहरों से यहां पहुंचना काफी आसान है। यह रेल, सड़क और हवाई मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। नजदीकी रेलवे स्टेशन केवड़िया है। सूरत रेलवे स्टेशन 156 किलोमीटर जबकि वडोदरा 90 किलोमीटर और अहमदाबाद 198 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां गुजरात राज्य परिवहन की बस से भी आ सकते हैं। ध्यान रखिएगा फिलहाल यहां आने के लिए बस सेवा रात साढ़े आठ बजे तक ही उपलब्ध है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक आप आसानी से अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों से पहुंच सकते है।
खुलने का समय

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी हर सोमवार को पर्यटकों के लिए बंद रहता है। मंगलवार से रविवार तक आप यहां सुबह 8:00 से शाम 6:00 बजे जा सकते हैं। हर शाम यहां शाम 7.30 बजेलेज़र लाइट और साउंड शो का आयोजन किया जाता है।

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

 -हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Popular posts from this blog

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

Contact Us

Work With Me FAM Trips, Blogger Meets, Product Launch Events, Product Review या किसी भी तरह के collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें। Contact me at:- Email – guptagitendra [@] gmail.com Twitter – @GuptaHitendra Instagram – @GuptaHitendra Facebook – GuptaHitendra

अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली: जहां जाने पर आपको मिलेगा स्वर्गिक आनंद

दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित स्वामीनारायण मंदिर अपनी वास्तुकला और भव्यता के लिए दुनियाभर में मशहूर है। करीब 100 एकड़ में फैला यह अक्षरधाम मंदिर दुनिया के सबसे बड़े मंदिर परिसर के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल है। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। इस मंदिर को बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) की ओर से बनाया गया है। इसे आम भक्तों- श्रद्धालुओं के लिए 6 नवंबर, 2005 को खोला गया था।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां प्रतिदिन शयन करने आते हैं भोलेनाथ महादेव

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में चौथा है। मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर- ममलेश्वर महादेव के रूप में। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इंदौर से 77 किलोमीटर पर है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले नर्मदा नदी में स्नान कर ऊं के आकार में बने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

About Us

Hitendra Gupta ट्रेवल ब्लॉगर, मीडिया प्रोफेशनल, डिजिटल इन्फ्लुएंसर और प्रकृति प्रेमी शाकाहारी मैथिल

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

हिंद-इस्लामी वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण शेरशाह सूरी का मकबरा

शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार रोहतास जिले के सासाराम में है। शेरशाह का यह मकबरा एक विशाल सरोवर के बीचोंबीच लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। शेरशाह ने अपने जीवनकाल में ही इस मकबरे का निर्माण शुरू कर दिया था, लेकिन पूरा उसके मृत्यु के तीन महीने बाद ही हो पाया। शेरशाह की मौत 13 मई, 1545 को कालिंजर किले में हो गई थी और मकबरे का निर्माण 16 अगस्त, 1545 को पूरा हुआ। शेरशाह के शव को कालिंजर से लाकर यहीं दफनाया गया था। इस मकबरे में 24 कब्रें हैं और शेरशाह सूरी की कब्र ठीक बीच में है।

Hanuman Temple Delhi: दिल्ली के इस मंदिर में तुलसीदास जी ने की थी हनुमान चालीसा की रचना

दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित है प्राचीन हनुमान मंदिर। मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रहती है। हनुमान जयंती को भी यहां भारी भीड़ जुटती है। इस हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह महाभारत काल का मंदिर है और हस्तिनापुर से अलग इंद्रप्रस्थ बसाने के क्रम में ही पांडवों ने इस मंदिर को बनाया था।

Rashtrapati Bhawan Tour: राष्ट्रपति भवन की सैर करना चाहते हैं, ऐसे कराएं बुकिंग

प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह हो या किसी पद्म सम्मान का समारोह, टीवी पर राष्ट्रपति भवन से जब भी कोई का कार्यक्रम प्रसारित होता है तो मन वहां जाने का करने लगता है। राष्ट्रपति भवन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के राष्ट्रपति का निवास स्थल है। इस इमारत के निर्माण में 17 साल का समय लगा है। इसका निर्माण कार्य 1912 में शुरु हुआ और 1929 में यह बन कर तैयार हुआ। इसे रायसीना हिल पर बनाया गया है।