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अक्षरधाम मंदिर सहज आनंद वाटर शो- तैयार हो जाइए एक अलग दुनिया में जाने के लिए...

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कोरोना महामारी के कारण आजकल दिल्ली स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद है। लेकिन जब खुला रहता है तो मंदिर प्रागंण में बने यज्ञपुरुष कुंड में हर शाम सहज आनंद वाटर शो का आयोजन किया जाता है। सिर्फ 24 मिनट के सहज आनंद वाटर शो में आपके सामने मल्टी-कलर लेजर शो, वीडियो प्रोजेक्शन्स, वाटर जेट, पानी की लहरों और रोशनी के साथ सिम्फनी सराउंड साउंड से एक ऐसा सुंदर कार्यक्रम पेश किया जाता है कि आप खुद को एक अलग ही दुनिया में पाते हैं। इस सहज आनंद वाटर शो के दौरान आप सब कुछ भूलकर, सुध-बुध खोकर एकटक शो को देखने में लगे रहते हैं। आपको इस दौरान खुद के होने का भी एहसास नहीं होता। आप खुद में वापस लौटते हैं शो के खत्म होने के बाद ही। इस शो में केना उपनिषद से लिए गए कहानी के जरिए आपको सहज आनंद से परिचय कराया जाता है। जीवन में सहज आनंद के लिए आपका ये शो देखना जरूर बनता है। अब जब भी कभी दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर आइए शाम में इस शो का आनंद जरूर लीजिए। तब तक शो के कुछ बेहतरीन तस्वीरों को देखिए-  सभी फोटो सौजन्य- Swaminarayan Akshardham Mandir मंदिर परिसर के अंदर कैमरा, मोबाइल के साथ किसी...

Hanuman Temple Delhi: दिल्ली के इस मंदिर में तुलसीदास जी ने की थी हनुमान चालीसा की रचना

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दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित है प्राचीन हनुमान मंदिर। मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रहती है। हनुमान जयंती को भी यहां भारी भीड़ जुटती है। इस हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह महाभारत काल का मंदिर है और हस्तिनापुर से अलग इंद्रप्रस्थ बसाने के क्रम में ही पांडवों ने इस मंदिर को बनाया था।

Rashtrapati Bhawan Tour: राष्ट्रपति भवन की सैर करना चाहते हैं, ऐसे कराएं बुकिंग

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प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह हो या किसी पद्म सम्मान का समारोह, टीवी पर राष्ट्रपति भवन से जब भी कोई का कार्यक्रम प्रसारित होता है तो मन वहां जाने का करने लगता है। राष्ट्रपति भवन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के राष्ट्रपति का निवास स्थल है। इस इमारत के निर्माण में 17 साल का समय लगा है। इसका निर्माण कार्य 1912 में शुरु हुआ और 1929 में यह बन कर तैयार हुआ। इसे रायसीना हिल पर बनाया गया है।

Agrasen Ki Baoli Delhi: दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास है अग्रसेन की बावली, गए हैं या नहीं?

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दिल्ली के बीचोंबीच कनॉट प्लेस के पास बना है अग्रसेन की बावली। कनॉट प्लेस और इंडिया गेट के बीच कस्तुरबा गांधी मार्ग पर हेली रोड के पास स्थित यह अग्रसेन की बावली बेहद ही खूबसूरत जगह है, लेकिन यह जानकर आपको ताज्जुब होगा कि दिल्ली के कई लोग इस बावली के बारे में नहीं जानते हैं। वैसे इक्का-दुक्का अप्रिय घटनाओं के कारण कुछ लोग इसे हॉन्टेड प्लेस भी कहते हैं।

Delhi Weekend Tour Kurukshetra: घूम आइए धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने दिए गीता के उपदेश

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कुरुक्षेत्र हरियाणा में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थल है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के दिए गीता के अपने पहले श्लोक में ही धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के रूप में इसका वर्णन किया है। इसी भूमि पर महाभारत की लड़ाई लड़ी गई थी। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को यहां के ज्योतिसर में कर्म के दर्शन का ज्ञान दिया था। 

Shri Balaji Salasar Dham: श्री बालाजी सालासर धाम मंदिर यात्रा

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श्री खाटू श्याम भगवान का दर्शन करने के बाद हम दिल्ली एनसीआर से आए सभी लोग श्री बालाजी सालासर धाम की ओर रवाना हो गए। श्री बालाजी सालासर धाम भी बहुत ही दिव्य स्थल है। यह राजस्‍थान के चुरू ज‌िले में है। यहां हनुमान जी को सालासर बालाजी के नाम से जानते हैं। शायद यह देश का एकलौता दाढ़ी-मूछों वाले हनुमान जी यानी बालाजी का मंदिर है।

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

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राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

Darbhanga Tour: मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में है पर्यटन की अपार संभावनाएं

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पग-पग पोखर, पान मखान सरस बोल, मुस्की मुस्कान विद्या-वैभव शांति प्रतीक ललित नगर दरभंगा थिक मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा विद्या, वैभव, खानपान, मधुर मुस्कान और अपनी मीठी बोली के लिए दुनियाभर में मशहूर है। ध्रुपद गायन, मिथिला पेंटिंग, सिक्की और सुजनी लोककला के साथ अपनी गौरवशाली संस्कृति पर मिथिला के लोग नाज कर करते हैं। इन गौरवशाली अतीत और आसपास सैकड़ों पर्यटक स्थल होने के बावजूद मिथिला का ह्रदय स्थल दरभंगा आजादी के बाद से ही उपेक्षित है।