Skip to main content

दिल्ली से वीकेंड यात्रा- घूम आइए धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने दिए गीता के उपदेश

कुरुक्षेत्र हरियाणा में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थल है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के दिए गीता के अपने पहले श्लोक में ही धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के रूप में इसका वर्णन किया है। इसी भूमि पर महाभारत की लड़ाई लड़ी गई थी। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को यहां के ज्योतिसर में कर्म के दर्शन का ज्ञान दिया था। 
धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र... बचपन से ही इसके बारे में सुनता आ रहा था और जब यहां जाने का मौका मिला तो मना नहीं कर पाया। निकल पड़ा दोस्तों के साथ वीकेंड पर छुट्टी मनाने के लिए। कुरुक्षेत्र दिल्ली से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पर है। दिल्ली से सुबह 6 बजे कार से कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुआ। दिल्ली से निकलने के बाद मुरथल के ढाबे पर दही-पराठे का नाश्ता किया। फिर यहां से पानीपत, करनाल होते हुए तीन घंटे में कुरुक्षेत्र पहुंच गया। दिल्ली से कुरुक्षेत्र पहुंचते ही आप फर्क महसूस करने लगेंगे। यह शहर काफी साफ-सुथरा है। दिल्ली के मुकाबले प्रदूषण भी काफी कम, नहीं के बराबर है। इसे धर्मनगरी कुरुक्षेत्र भी कहा जाता है।
ब्रह्मसरोवर
पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र का नाम राजा कुरु के नाम पर रखा गया था। यह पूरा इलाका 48 कोस में फैला हुआ है। यहां आपको महाभारत काल की घटनाओं से संबंधित कई स्थल और मंदिर मिल जाएंगे। यहां का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ब्रह्मसरोवर है। कुरुक्षेत्र पहुंचने के बाद सबसे पहले ब्रह्मसरोवर में स्नान कर पुण्य का भागी बना।
 कहा जाता है कि इस सरोवर में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। सूर्यग्रहण पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर लाखों लोग ब्रह्मसरोवर में स्नान करते हैं। यह ब्रह्मसरोवर काफी बड़े इलाके में फैला हुआ है। चारों ओर से इसका सौंदर्यीकरण किया गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने यहां के विकास के लिए काफी काम किया है। ब्रह्मसरोवर में रात में प्रकाश की व्यवस्था भी की गयी है। रात में यहां एक अलग ही दृश्य देखने को मिलता है। कहा जाता है कि इस ब्रह्मसरोवर की खुदाई राजा कुरु ने करवाई थी।
 लोगों ने यह भी बताया कि महाभारत युद्ध के खत्म होने के दिन दुर्योधन इसी ब्रह्मसरोवर के पानी के नीचे छिप गया था। ब्रह्मसरोवर के बीच में भगवान शिव का एक मंदिर भी है। यहां जाने के लिए एक छोटा सा पुल बनाया गया है।
  यहीं पर रथ पर सवार भगवान कृष्ण और अर्जुन की प्रतिमा है। बहुत ही खूबसूरत दृश्य है यहां का। यह एक तरह से सेल्फी प्वाइंट भी बन गया है। रात में यहां लाइटिंग की सुंदर व्यवस्था की गई है।
इस सरोवर के किनारे दिल्ली हाट की तर्ज पर स्टॉल भी बनाए गए हैं। यहां हर साल नवंबर-दिसंबर में गीता जयंती समारोह का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर देश भर से विद्वान लोग जुटते हैं।
सन्निहित सरोवर
ब्रह्मसरोवर के पास ही कुछ दूरी पर सन्निहित सरोवर है। इसे भी काफी पवित्र सरोवर माना जाता है। इस सरोवर के बारे में मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति के लिए यहां पिंडदान किया था। इस सरोवर के जल में अमावस्या को स्नान करना काफी पुण्यकारी माना जाता है।
ज्योतिसर
कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर के बाद सबसे पवित्र और प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल ज्योतिसर है। कहा जाता है कि यहीं पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता उपदेश के बाद यहीं से महाभारत युद्ध शुरू हुआ था। यहां एक विशाल बरगद का वृक्ष है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसी वट वृक्ष के नीचे भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था।
भगवान ने अर्जुन को अपना विराट रूप यहीं दिखाया था। यहां जानकर खुशी हुई कि इस अक्षय वट वृक्ष के चबूतरे का निर्माण दरभंगा के महाराजा ने करवाया था। इस अक्षय वृक्ष के नीचे बैठकर आप असीम शांति का अनुभव करेंगे। यहां एक गीता मंदिर भी है।
अन्य स्थल
कुरुक्षेत्र के पास ही मां भद्रकाली शक्तिपीठ है। यह देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। यह हरियाणा का एकमात्र शक्तिपीठ है। इसके पास ही श्री स्थानेश्वर महादेव मन्दिर है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन समेत यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी। शहर में ही आपको शेख चिली का मकबरा भी एक दर्शनीय स्थल है। यहां भी देश भर से लोग आते हैं।
कैसे पहुंचें
कुरुक्षेत्र रेल और सड़क मार्ग से देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां आने में आपको कोई परेशानी नहीं होगी। दिल्ली से यहां आने में आपको करीब तीन घंटे लगेंगे।
ट्रेन से
दिल्ली से ट्रेन से आने के लिए सबसे बढ़िया ऑप्शन कालका शताब्दी एक्सप्रेस है। इस ट्रेन से आप सुबह 7.40 पर नई दिल्ली से चलिए और दो घंटे के बाद 9.42 पर कुरुक्षेत्र पहुंच जाइए। रास्ते में स्नैक्स भी ट्रेन में मिल जाने के कारण बीच में नाश्ते का झंझट भी खत्म। वापसी में रात 7.40 पर कुरुक्षेत्र से कालका शताब्दी से चलकर रात 10 बजे दिल्ली पहुंच जाएंगे। रात का खाना ट्रेन में मिल जाएगा।
बस-कार से
दिल्ली से बस या कार से कुरुक्षेत्र जाना काफी आसान है। दिल्ली से करीब 160 किलोमीटर की दूरी पर है कुरुक्षेत्र। आप राज्य परिवहन निगम की बस से यहां साढ़े तीन-चार घंटे में यहां आराम से खाते-पीते पहुंच जाएंगे।
हवाई जहाज से
कुरुक्षेत्र का निकटतम एयरपोर्ट दिल्ली और चंडीगढ़ हैं। यहां से आप सड़क या रेल मार्ग से कुरुक्षेत्र पहुंच सकते हैं।

FAM Trips, Blogger Meets, Product Launch Events, Product Review या किसी भी तरह का collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें।
ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। धन्यवाद...
#TalesOfHitendra #Hitendrawrites #MyFriendAlexa #Blogchatter

Comments

Popular posts from this blog

Contact Us

Work With Me FAM Trips, Blogger Meets, Product Launch Events, Product Review या किसी भी तरह के collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें। Contact me at:- Email – guptagitendra [@] gmail.com Twitter – @GuptaHitendra Instagram – @GuptaHitendra Facebook – GuptaHitendra

दिल्ली के इस मंदिर में तुलसीदास जी ने की थी हनुमान चालीसा की रचना

दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित है प्राचीन हनुमान मंदिर। मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रहती है। हनुमान जयंती को भी यहां भारी भीड़ जुटती है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह महाभारत काल का मंदिर है और हस्तिनापुर से अलग इंद्रप्रस्थ बसाने के क्रम में ही पांडवों ने इस मंदिर को बनाया था।

राष्ट्रपति भवन की सैर करना चाहते हैं, ऐसे कराएं बुकिंग

प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह हो या किसी पद्म सम्मान का समारोह, टीवी पर राष्ट्रपति भवन से जब भी कोई का कार्यक्रम प्रसारित होता है तो मन वहां जाने का करने लगता है। राष्ट्रपति भवन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के राष्ट्रपति का निवास स्थल है। इस इमारत के निर्माण में 17 साल का समय लगा है। इसका निर्माण कार्य 1912 में शुरु हुआ और 1929 में यह बन कर तैयार हुआ। इसे रायसीना हिल पर बनाया गया है।

About Us

Hitendra Gupta ट्रेवल ब्लॉगर, मीडिया प्रोफेशनल, डिजिटल इन्फ्लुएंसर और प्रकृति प्रेमी शाकाहारी मैथिल

भूतों का गढ़: भानगढ़

क्या वाकई में भूत होते हैं ? क्या वो दिखाई देते हैं ? क्या वो किसी रुप में खुद के होने का अहसास कराते हैं ? जो लोग भूत-प्रेतों में विश्वास करते हैं जाहिर है उनका जवाब हां में होगा । लेकिन नहीं मानने वाले इन बातों को हंसी में उड़ा देंगे । लेकिन भारत सरकार का पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उन लोगों में शामिल है जो इस धारणा में विश्वास करता है कि वास्तव में भूत होते हैं । यानि सरकारी तौर पर भूतों के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया गया है । कम से कम राजस्थान के भानगढ़ किले को लेकर तो ये कहा हीं जा सकता है । किले के बाहर भारतीय पुरातत्व विभाग का बोर्ड लगा है, जिस पर स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि यहां सूर्यास्त के बाद प्रवेश वर्जित है। दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला देश की दस सबसे डरावनी भूतिया जगहों की सूची में यूं हीं शुमार नहीं है । वैसे भी, पुराने किले, मौत, हादसों, अतीत और रूहों का अपना एक अलग ही सबंध और संयोग होता है । दुनिया भर में कई ऐसे पुराने किले है जिनका अपना एक अलग ही काला अतीत है और वहां आज भी रूहों का वास होने की बात कही जाती है ।भानगढ़ के

मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में है पर्यटन की अपार संभावनाएं

पग-पग पोखर, पान मखान सरस बोल, मुस्की मुस्कान विद्या-वैभव शांति प्रतीक ललित नगर दरभंगा थिक मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा विद्या, वैभव, खानपान, मधुर मुस्कान और अपनी मीठी बोली के लिए दुनियाभर में मशहूर है। ध्रुपद गायन, मिथिला पेंटिंग, सिक्की और सुजनी लोककला के साथ अपनी गौरवशाली संस्कृति पर मिथिला के लोग नाज कर करते हैं। इन गौरवशाली अतीत और आसपास सैकड़ों पर्यटक स्थल होने के बावजूद मिथिला का ह्रदय स्थल दरभंगा आजादी के बाद से ही उपेक्षित है।

खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

ये हैं नोएडा सेक्टर 18 मार्केट के सात सबसे बढ़िया शाकाहारी रेस्टोरेंट

आजकल शहर के बड़े रेस्त्रां में वेज-नॉन वेज दोनों खाना एक साथ परोसे जाने से शाकाहारी लोगों को काफी परेशानी होती है। शाकाहारी लोगों के लिए शहरों में खाने-पीने की बेहतर जगह ढूंढना काफी मुश्किल होता है। आपकी इसी परेशानी को ध्यान में रखकर आज मैं नोएडा के मेन मार्केट सेक्टर 18 के सात बेस्ट शाकाहारी रेस्त्रां का यहां जिक्र करने जा रहा हूं। अब जब भी नोएडा सेक्टर 18 या इसके आसपास के इलाके में मार्केटिंग

श्री खाटू श्याम जी दर्शन यात्रा

राजस्थान में शेखावाटी इलाके के सीकर जिले में है खाटू श्याम धाम। यहां भगवान श्रीकृष्ण के कलयुगी अवतार खाटू श्यामजी की दुनियाभर में प्रसिद्ध मंदिर है। बचपन से ही श्री खाटू श्याम जी भगवान के दर्शन की इच्छा थी और जब पता चला कि हमारे यहां से एक बस खाटू जी जा रही है, तो खुद को रोक ना सका। शनिवार की रात