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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग यात्रा: आस्था, प्रकृति और रोमांच का संगम

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महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों में स्थित इस ज्योतिर्लिंग के शिवलिंग का आकार बड़ा होने के कारण इसे 'मोटेश्वर महादेव' के नाम से भी जानते हैं। अगर आप शिवभक्त हैं या नेचर लवर तो भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग आपके लिए एकदम परफेक्ट जगह है। यहां आप सिर्फ भगवान शिव के पवित्र ज्योतिर्लिंग का ही दर्शन नहीं करेंगे, बल्कि यहां के घने जंगल, पहाड़, ठंडी हवा और

महाकुंभ 2025: आस्था, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम

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प्रयागराज महाकुंभ आस्था, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम बन गया है। इस बार का महाकुंभ 2025 अब तक के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक बन गया है। यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर अभी तक 58 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र स्नान कर चुके हैं। मकर संक्रांति से लेकर महाशिवरात्रि

पार्वती हिल्स: यहां ये पुणे शहर का नजारा लेने के साथ नारायण और देवदेवेश्वर के भी कर सकते हैं दर्शन

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पार्वती हिल पुणे का एक फेमस जगह है। यहां करीब 2100 फीट की ऊंचाई से पुणे शहर का शानदार नजारा दिखता है। लोग यहां सुबह और शाम में सूर्योदय और सूर्यास्त देखने भी आते हैं। यहां आते ही आप एक अलग ही तरह का सुकून महसूस करेंगे। पार्वती हिल्स की चोटी पर एकांत में कई प्रेमी जोड़े भी बैठे मिल जाएंगे।

सोमेश्वर महादेव मंदिर: पुणे का 700 साल पुराना स्वयंभू मंदिर

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सोमेश्वर महादेव मंदिर पुणे के पाषण इलाके में एक प्राचीन मंदिर है। बताया जाता है कि यह करीब 700 साल पुराना मंदिर है। लोगों का कहना है कि यह स्वयंभू महादेव मंदिर है। यानी यहां शिवलिंग को स्थापित नहीं किया गया था बल्कि यहां भोलेनाथ खुद प्रकट हुए थे। यहां सोमेश्वर महादेव का शिवलिंग खुद प्रकट हुआ था। इस कारण लोगों के बीच इस मंदिर की काफी मान्यता है।

त्र्यंबकेश्‍वर ज्योतिर्लिंग- एकमात्र ज्योतिर्लिंग जहां होते हैं तीनों देव के दर्शन

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हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक त्र्यंबकेश्‍वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में नासिक के पास है। त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर ब्रह्मगिरी पर्वत की तलहटी में स्थित है। हर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव जहां लिंग स्वरूप में विराजमान हैं, वहीं त्र्यंबकेश्‍वर ज्योतिर्लिंग में भगवान ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश तीनों स्वरूप में विराजमान हैं। एक ज्योतिर्लिंग में ही तीनों देव के दर्शन का सौभाग्य सिर्फ यहीं मिल सकता है।

श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर: यहां दर्शन मात्र से हो जाती है हर मनोकामनाएं पूरी

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प्रथम देव गणेश। विध्नहर्ता, मंगलमूर्ति गणेश। हिंदू धर्म में हम हर विध्न-बाधा को दूर कर मंगल करने वाले देव गणेश की पूजा हम सबसे पहले करते हैं। वैसे में भगवान गणेश के देश भर में कई बड़े और प्रतिष्ठित मंदिर हैं, लेकिन महाराष्ट्र में पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर की भक्तों के बीच अपनी एक अलग मान्यता और पहचान है। हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं में श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर को लेकर काफी आस्था है। यहां देश दुनिया से हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं।

नंदीग्राम: अयोध्या के पास भगवान राम से जुड़ा एक प्रमुख स्थल, जिसके बारे में कम ही लोगों को है पता

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अयोध्या के पास भगवान राम से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक स्थल है नंदीग्राम। नंदीग्राम भी अयोध्या की तरह ही एक पवित्र तीर्थ स्थल है, लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। रामायण के हिसाब से नंदीग्राम का काफी महत्व है। फिर भी यहां नहीं के बराबर श्रद्धालु आते हैं। इस जगह के विकास पर अब तक कोई विशेष ध्यान दिया गया, लेकिन अब राम मंदिर निर्माण के साथ ही यहां के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

श्रीराम-जानकी यात्रा: अयोध्या से जनकपुर तक भारत गौरव डीलक्स AC Tourist Train, जानिए पैकेज के बारे में सबकुछ

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रामभक्तों के लिए एक अच्छी खबर है। भारतीय रेल ने भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से उनकी ससुराल नेपाल के जनकपुर तक एक स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। भारतीय रेल ने कहा है कि 17 फरवरी, 2023 से नई दिल्ली से भारत गौरव डीलक्स एसी टूरिस्ट ट्रेन शुरू करने जा रही है। इस ट्रेन टूर का नाम 'श्रीराम-जानकी यात्रा: अयोध्या से जनकपुर' नाम दिया गया है। यह यात्रा 7 दिन की होगी।

उत्तर प्रदेश के वे टॉप 10 पर्यटन स्थल, जहां गए बिना आपकी यात्रा नहीं होगी पूरी

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उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। उत्तर प्रदेश काफी खूबसूरत राज्य है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। भगवान राम की नगरी अयोध्या, भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन से लेकर भगवान बुद्ध से संबंधित सारनाथ और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों पर हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। महादेव की नगरी काशी, कुंभनगरी प्रयागराज से लेकर प्रेम प्रतीक की नगरी आगरा जैसे पर्यटक स्थल घुमक्कड़ों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बने हुए हैं। नजाकत, नफासत और तहजीब के शहर लखनऊ गए बिना तो जैसे आपकी यात्रा पूरी ही नहीं होगी। सभी फोटो- यूपी टूरिज्म नए साल में लोग फिर से घर से बाहर निकला शुरू कर दिए हैं। वे नई-नई जगहों पर जा रहे हैं तो ऐसे में आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के उन टॉप 10 पर्यटन स्थलों के बारे में जहां आप देश के किसी भी कोने से आसानी से पहुंच सकते हैं। 1. वाराणसी बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को बनारस या काशी के नाम से भी जानते हैं। काशी दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी के रूप में विख्यात है। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे का...

कैंची धाम: हनुमान जी के अवतार बाबा नीब करौरी के आश्रम में आते ही हो जाती हैं हर मुराद पूरी

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नीब करौरी बाबा...नाम सुनते ही शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। मन में असीम शांति का अनुभव होने लगता है। हर दुख-दर्द दूर होता दिखने लगता है। हालांकि बाबा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन कहीं से ये नहीं लगता कि वे पास नहीं हैं। हर पल-हर क्षण बाबा नीब करौरी आंखों के सामने नजर आने लगते हैं। बाबा जब दिल-दिमाग और जेहन में उतर जाए, तो फिर आपको भी इसी तरह का आभास होगा। ऐसा ही अनुभव और एहसास होगा। आप हर घड़ी बाबा को अपने साथ महसूस करेंगे और जब बाबा साथ हो तो चिंता किस बात की।  

दिल्ली में हैं तो नवरात्रि पर इन दुर्गा मंदिरों में जरूर जाइए

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दुर्गा पूजा तो वैसे बंगाल-बिहार का मशहूर है। लेकिन नवरात्रि के दौरान दिल्ली में एक अलग ही उमंग होता है। दिल्ली के लोग नवरात्र को काफी आनंद और उत्साह के साथ मनाते हैं। बड़े-बड़े पंडाल लगाए जाते हैं और रामलीला का मंचन भी होता है। दशहरा के दिन रावण वध देखने के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं। इस सबके बीच दिल्ली के कुछ दुर्गा मंदिर हैं, जिसकी हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के बीच काफी मान्यता है।

बिहार के प्रमुख पर्यटल स्थल

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बिहार के बारे में जानकारी ना होने के कारण लोगों को काफी गलतफहमी है। इसमें मीडिया का भी बहुत बड़ा हाथ है। अखबार और न्यूज चैनलों में ज्यादातर निगेटिव खबरों के कारण लोग बिहार के बारे में सही से नहीं जानते। विहार... विहारों की भूमि बिहार से ही बौद्ध और जैन धर्म का पार्दुभाव हुआ। खालसा पंथ के संस्थापक सिखों के के दसवें और आखिरी गुरु श्री गुरुगोविंद सिंह देव जी का जन्म भी बिहार में हुआ। दुनिया को सबसे पहले लोकतंत्र बिहार ने ही दिया और दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालय का खंडहर आज भी विद्यमान है।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर: पुराण से भी पुराना है बाबा का धाम

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दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी वाराणसी में है भव्य श्री काशी विश्वनाथ मंदिर। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल काशी विश्वनाथ मंदिर को विश्वेश्वर नाम से भी जाना है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ अनादि काल से ही यहां विराज रहे हैं। इसीलिए आदिलिंग के रूप में अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है। मान्यता है कि महादेव शिव और माता पार्वती का यह आदि स्थान है।

गुरु गोरखनाथ के भक्तों के लिए खुशखबरी, यूपी का अग्रणी पर्यटन केंद्र बनेगा बुंदेलखंड का गोरखगिरि

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गुरु गोरखनाथ के भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। बुंदेलखंड में महोबा स्थित गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली गोरखगिरि उत्तर प्रदेश का अग्रणी पर्यटन केंद्र बनेगा। नाथ संप्रदाय के प्रणेता गुरु गोरखनाथ के सपनों को साकार करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखगिरि पर्वत पर मंदिर, बाजार, रोप-वे, धर्मशाला, ध्यानकेंद्र बनवा रहे हैं। इसके साथ यहां गुरु गोरखनाथ की एक बड़ी भव्य प्रतिमा भी स्थापित होगी। इस पर करीब 25 करोड़ की लागत आएगी। करीब दो हजार फीट ऊंचे गोरखगिरि पर्वत पर सिद्ध बाबा मंदिर है। यहां गर्भगृह में गुरु गोरखनाथ की खड़ाऊं-चिमटा रखा हुआ है।

घुमक्कड़ों के लिए खुशखबरी, गुजरात का केवड़िया बनेगा इको फ्रेंडली पर्यटन स्थल

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गुजरात घूमने की ख्वाहिश रखने वाले पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है। गुजरात सरकार केवड़िया को इको फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर डेवलप कर रही है। 15 अगस्त से केवड़िया को ई-रिक्शा और ई-कार के लिए खोल दिया गया है। फिलहाल यहां 10 ई-रिक्शा और ई-कार शुरू किए गए हैं। 31 अक्तूबर से यहां सिर्फ ई वाहन ही चलेंगे। 31 अक्तूबर के बाद यहां डीजल- पेट्रोल की गाड़ियां नहीं चलेंगी। इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त करने पर काम हो रहा है। पर्यटकों के लिए यहां ई-बस भी चलाए जाएंगे।

श्रद्धालुओं के लिए खुला पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का पट, जानिए क्यों खास है यह मंदिर

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ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का पट 16 अगस्त से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। 16 से 22 अगस्त तक सिर्फ पुरी के निवासी ही भगवान के दर्शन कर पाएंगे। 23 अगस्त के बाद यहां आने वाले सभी श्रद्धालु भगवान श्री जगन्नाथ का दर्शन कर पाएंगे। मंदिर में आप सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक भगवान के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं को कोरोना दिशानिर्देशों के तहत मास्क, सैनिटाइजर का इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा। राज्य से बाहर के लोगों को 96 घंटे के भीतर वाला आरटी-पीसीआर टेस्ट या कोविड-वैक्सीनेसन का सर्टिफिकेट दिखाना होगा।

सुजाता गढ़ स्तूप: यहीं भक्त सुजाता से खीर खाकर भगवान बुद्ध को हुई थी ज्ञान का प्राप्ति

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बिहार के गया में निरंजना नदी के किनारे बकरौर गांव में स्थित सुजाता गढ़ बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल है। यह जगह धार्मिक के साथ पुरातात्विक दृष्टि से भी काफी महत्‍वपूर्ण है। खुदाई के दौरान यहां भगवान बुद्ध की विशाल खंडित प्रतिमा और भगवान विष्णु की एक फीट ऊंची काले प्राचीन पत्थर की प्रतिमा मिली थी। यहां खुदाई में पाल वंश कालीन अभिलेख और प्रतिमा मिले हैं। यहां मिले स्तूप का व्यास 150 फीट और ऊंचाई 50 फीट है। बताया जाता है कि इस स्तूप का निर्माण सम्राट अशोक ने करवाया था।

पटना का रिवरफ्रंट गांधी घाट, वीकेंड पर शांति के बीच शाम में लीजिए गंगा आरती का आनंद

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पटना में एक बेहद खूबसूरत जगह है- गांधी घाट। इसे आप पटना का रिवरफ्रंट भी कह सकते हैं।  गंगा नदी के किनारे पटना में कई घाट है, लेकिन सबसे लोकप्रिय घाट है गांधी घाट। इस घाट का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है। यहां गांधीजी की अस्थियां विसर्जित होने के कारण इसका नाम गांधी घाट रखा गया है। इसलिए इस घाट का एक ऐतिहासिक महत्व भी है।

यूपी-बिहार से हनीमून पर नहीं जा सकते दूर? तो पास में ही हैं बजट के अंदर के ये रोमांटिक जगहें

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आमतौर पर रोमांटिक और हनीमून डेस्टिनेशन को लेकर लोगों के जेहन में हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और केरल के नाम ही सामने आते हैं। लेकिन कोरोना के कारण या फिर बजट को लेकर हम कई बार इन जगहों पर नहीं जा पाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमारे घर के आसपास यूपी-बिहार में ऐसा कुछ नहीं है जहां हनीमून मनाने या रोमांटिक डेट पर जा सके?

श्रावण महीने में कांवड़ों की धूम देखनी है तो यहां जाएं

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इस साल 25 जुलाई से सावन शुरू हो रहा है। सावन यानी श्रावण का महीना हिंदू धर्म के लोगों के लिए काफी खास है। श्रावण के महीने में करोड़ों हिंदू श्रद्धालु कांवड़ लेकर बाबा के धाम जाते हैं। इस महीने कांवड़ों की धूम रहती है। कुंभ के तरह ही उनकी कांवड़ यात्रा के लिए सरकार की ओर से काफी इंतजाम किए जाते हैं। सरकार की ओर से पूरा ख्याल रखा जाता है कि गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़ियों को कोई परेशानी ना हो।