Skip to main content

घुमक्कड़ों के लिए खुशखबरी, गुजरात का केवड़िया बनेगा इको फ्रेंडली पर्यटन स्थल

गुजरात घूमने की ख्वाहिश रखने वाले पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है। गुजरात सरकार केवड़िया को इको फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर डेवलप कर रही है। 15 अगस्त से केवड़िया को ई-रिक्शा और ई-कार के लिए खोल दिया गया है। फिलहाल यहां 10 ई-रिक्शा और ई-कार शुरू किए गए हैं। 31 अक्तूबर से यहां सिर्फ ई वाहन ही चलेंगे। 31 अक्तूबर के बाद यहां डीजल- पेट्रोल की गाड़ियां नहीं चलेंगी। इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त करने पर काम हो रहा है। पर्यटकों के लिए यहां ई-बस भी चलाए जाएंगे।



उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरदार पटेल की जन्म जयंती पर 31 अक्तूबर को केवड़िया को नो पोल्यूशन जोन घोषित करेंगे। इससे यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्हें ई-रिक्शा और ई-कार के बारे में जरूरी ट्रेनिंग दिए जाएंगे। ट्रेनिंग पूरा कर लेने पर उन्हें ई वाहन भी दिए जाएंगे। इससे स्टेच्यू ऑफ यूनिटी आने वाले लोगों को सुविधा होगी। साथ ही उन्हें स्वच्छ साफ वातावरण भी मिल सकेगा।
                                 

केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी है। देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की इस प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है। इसके ग्राउंड फ्लोर पर एक विशाल प्रदर्शनी कक्ष का निर्माण किया गया है। यह कक्ष 4,647 वर्ग मीटर क्षेत्र मे फैला हुआ है। देश के करीब 169,058 गांवों से मिट्टी लाकर 36 फीट गुना 12 फीट की एक दीवार वॉल ऑफ यूनिटी बनाई गई है। यह दीवार देश की विविधता मे एकता का प्रतिनिधित्व करती है।


स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार सरोवर बांध से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नर्मदा नदी के साधुबेट पर स्थित यह स्मारक की दुनिया के प्रमुख पर्यटक केंद्रों में एक है। यहां पर्यटकों के लिए रहने, खाने-पीने के साथ परिवहन सेवा और हेल्थ से जुड़ी हाई क्वालिटी की सुविधाएं उपलब्ध है।


कैसे पहुंचे-

गुजरात के सभी प्रमुख शहरों से यहां पहुंचना काफी आसान है। यह रेल, सड़क और हवाई मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। नजदीकी रेलवे स्टेशन केवड़िया है। सूरत रेलवे स्टेशन 156 किलोमीटर जबकि वडोदरा 90 किलोमीटर और अहमदाबाद 198 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां गुजरात राज्य परिवहन की बस से भी आ सकते हैं। ध्यान रखिएगा फिलहाल यहां आने के लिए बस सेवा रात साढ़े आठ बजे तक ही उपलब्ध है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक आप आसानी से अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों से पहुंच सकते है।


कब पहुंचे-

केवड़िया गुजरात में है और यहां काफी गर्मी पड़ती है। इसलिए यहां सितंबर से मार्च के बीच आना सबसे अच्छा रहता है।

खुलने का समय
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी हर सोमवार को पर्यटकों के लिए बंद रहता है। मंगलवार से रविवार तक आप यहां सुबह 8:00 से शाम 6:00 बजे जा सकते हैं। हर शाम यहां शाम 7.30 बजेलेज़र लाइट और साउंड शो का आयोजन किया जाता है।

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

-हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Post a Comment

अपना कमेंट यहां लिखें-

Popular posts from this blog

उत्तर प्रदेश के वे टॉप 10 पर्यटन स्थल, जहां गए बिना आपकी यात्रा नहीं होगी पूरी

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। उत्तर प्रदेश काफी खूबसूरत राज्य है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। भगवान राम की नगरी अयोध्या, भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन से लेकर भगवान बुद्ध से संबंधित सारनाथ और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों पर हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। महादेव की नगरी काशी, कुंभनगरी प्रयागराज से लेकर प्रेम प्रतीक की नगरी आगरा जैसे पर्यटक स्थल घुमक्कड़ों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बने हुए हैं। नजाकत, नफासत और तहजीब के शहर लखनऊ गए बिना तो जैसे आपकी यात्रा पूरी ही नहीं होगी। सभी फोटो- यूपी टूरिज्म नए साल में लोग फिर से घर से बाहर निकला शुरू कर दिए हैं। वे नई-नई जगहों पर जा रहे हैं तो ऐसे में आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के उन टॉप 10 पर्यटन स्थलों के बारे में जहां आप देश के किसी भी कोने से आसानी से पहुंच सकते हैं। 1. वाराणसी बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को बनारस या काशी के नाम से भी जानते हैं। काशी दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी के रूप में विख्यात है। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे का...

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।