Skip to main content

दिल्ली में हैं तो नवरात्रि पर इन दुर्गा मंदिरों में जरूर जाइए

दुर्गा पूजा तो वैसे बंगाल-बिहार का मशहूर है। लेकिन नवरात्रि के दौरान दिल्ली में एक अलग ही उमंग होता है। दिल्ली के लोग नवरात्र को काफी आनंद और उत्साह के साथ मनाते हैं। बड़े-बड़े पंडाल लगाए जाते हैं और रामलीला का मंचन भी होता है। दशहरा के दिन रावण वध देखने के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं। इस सबके बीच दिल्ली के कुछ दुर्गा मंदिर हैं, जिसकी हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के बीच काफी मान्यता है।

नवरात्र के दौरान लोग इन मंदिरों में मां दुर्गा का दर्शन और पूजा-अर्चना करने जरूर जाते हैं। दिल्ली के प्रसिद्ध मंदिरों में कालकाजी मंदिर, झंडेवालां मंदिर और छतरपुर मंदिर शामिल है। दिल्ली के इन मंदिरों के बारे में मान्यता है कि यहां माता भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी करती हैं। आप भी दुर्गा पूजा के दौरान माता भगवती का दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

कालकाजी मंदिर
दक्षिण दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास है श्री कालकाजी मंदिर। माता कालका को मां काली देवी का अवतार माना जाता है। इसे जयंती पीठ या मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम भी जाना जाता है। इस मंदिर के बारे में आम लोगों में मान्यता है कि यहां श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। हालांकि इस मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में किया गया था, लेकिन वर्तमान मंदिर का निर्माण बाबा बालक नाथ जी ने कराया था। अब इस मंदिर को और आधुनिक रूप देने की कोशिश हो रही है। जल्दी ही यह मंदिर एक नए आवरण में दिखाई देगा। नवरात्र पर यहां रोज हजारों लोग माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया-संवारा जाता है। श्री कालकाजी मंदिर में अखंड दीप प्रज्जवलित है और प्रथम नवरात्र के दिन भक्त यहां से माता की जोत अपने घर लेकर जाकर अखंड जोत जलाते हैं। नवरात्र को दर्शन के लिए जाते समय कुछ समय लेकर जाएं, क्योंकि इस समय यहां भारी भीड़ उमड़ती है और दर्शन में काफी समय लग जाता है।


दिल्ली के किसी भी इलाके से श्री कालकाजी मंदिर पहुंचना काफी आसान है। यह मंदिर कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन के पास है। मेट्रो स्टेशन से निकलकर आप पैदल मंदिर पहुंच सकते हैं। मंदिर के पास ही नेहरू प्लेस का बस अड्डा भी है और दिल्ली के किसी भी इलाके से आप यहां बस से भी पहुंच सकते हैं।

झंडेवाला मंदिर
झंडेवाला मंदिर दिल्ली के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के कारण ही इस इलाके का नाम भी झंडेवाला हो गया है। यह मंदिर झंडेवाली देवी को समर्पित सिद्धपीठ है। बताया जाता है कि यह मंदिर दो सौ साल से भी पुराना है। दिल्ली के एक बड़े व्यापारी श्री बद्री दास जी को अरावली की पहाडियों मे मंदिर होने का आभास हुआ और यहां खुदाई कराने पर उन्हें एक गहरी गुफा में देवी माता की एक मूर्ति और झंडा मिला। खुदाई में सबसे पहले झंडा मिलने के कारण इस मंदिर का नाम झंडेवाला मंदिर पड़ा। खुदाई में यहां एक शिवलिंग भी मिला। आज भी यह गुफा वाली देवी माता और शिवलिंग श्रद्धालुओं की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। इसके साथ ही गुफा में उस समय जगाई गई ज्योति आज भी अखंड रूप में जल रही है। मान्यता है कि नवरात्र पर देवी मां का दर्शन करने मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। नवरात्र पर यहां काफी भीड़ उमड़ती है। दर्शन के लिए आपको घंटों इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन इंतजार के बाद भी दर्शन हो जाने पर मन को जो शांति मिलती है उसका आप वर्णन नहीं कर सकते हैं। अगर आप नवरात्रि के अवसर पर दिल्ली के आसपास हैं तो आपको झंडेवाला मंदिर जरूर जाना चाहिए।


कालकाजी मंदिर की तरह ही झंडेवाला मंदिर भी पहुंचना काफी आसान है। दिल्ली के करोलबाग और कनॉट प्लेस के पास होने के कारण आप यहां बस, मेट्रो या दूसरी सवारी से भी आ सकते हैं। झंडेवाला मेट्रो स्टेशन से आप यहां पैदल या ऑटो लेकर भी पहुंच सकते हैं।

छत्तरपुर मंदिर
नवरात्र के दौरान लोगों के बीच दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय मंदिर है छत्तरपुर स्थित आद्या कात्यायिनी मंदिर। छतरपुर इलाके में होने के कारण लोग इसे छतरपुर मंदिर भी कहते हैं। हालांकि यह कालकाजी और झंडेवाला मंदिर से काफी नया है, लेकिन काफी कम समय में श्रद्धालुओं के बीच अपनी जगह बना चुका है। करीब 70 एकड़ में फैला देवी दुर्गा के छठे स्‍वरूप माता कात्यायनी को समर्पित यह मंदिर देश का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। यहां एक दर्जन से ज्यादा छोटे-बड़े मंदिर हैं। सभी मंदिर एक से बढ़कर एक हैं। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर की आभा देखते ही बनती है। इस समय मंदिर को काफी आकर्षक तरीके से सजाया जाता है। देवी मां का श्रृंगार खास तौर पर बाहर से मंगाए गए फूलों से किया जाता है। मंदिर में माता कात्यायनी के रौद्र स्वरूप की पूजा होती है। माता कात्यायनी के दिव्य-भव्य रूप का दर्शन कर श्रद्धालु अपने को धन्य मानते हैं। दुर्गा पूजा पर यहां बहुत ज्यादा भीड़ उमड़ती है। भीड़ का कारण आपको दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए काफी इंतजार करना पड़ सकता है।


नवरात्र के दौरान आपको भी आद्या कात्यायिनी मंदिर में माता के दर्शन जरूर करने चाहिए। आपके लिए दिल्ली के किसी भी जगह से छतरपुर मंदिर पहुंचना बहुत आसान है। यह मंदिर छतरपुर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित है। आप यहां बस से भी बिना किसी परेशानी के पहुंच सकते हैं।

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

-हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Popular posts from this blog

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

उत्तर प्रदेश के वे टॉप 10 पर्यटन स्थल, जहां गए बिना आपकी यात्रा नहीं होगी पूरी

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। उत्तर प्रदेश काफी खूबसूरत राज्य है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। भगवान राम की नगरी अयोध्या, भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन से लेकर भगवान बुद्ध से संबंधित सारनाथ और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों पर हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। महादेव की नगरी काशी, कुंभनगरी प्रयागराज से लेकर प्रेम प्रतीक की नगरी आगरा जैसे पर्यटक स्थल घुमक्कड़ों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बने हुए हैं। नजाकत, नफासत और तहजीब के शहर लखनऊ गए बिना तो जैसे आपकी यात्रा पूरी ही नहीं होगी। सभी फोटो- यूपी टूरिज्म नए साल में लोग फिर से घर से बाहर निकला शुरू कर दिए हैं। वे नई-नई जगहों पर जा रहे हैं तो ऐसे में आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के उन टॉप 10 पर्यटन स्थलों के बारे में जहां आप देश के किसी भी कोने से आसानी से पहुंच सकते हैं। 1. वाराणसी बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को बनारस या काशी के नाम से भी जानते हैं। काशी दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी के रूप में विख्यात है। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे का

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

ये हैं दिल्ली के टॉप 10 पर्यटक स्थल, नए साल में आप भी घूम आइए

दिल्ली देश की राजधानी है। यहां हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटक आते हैं। दिल्ली में इंडिया गेट, लाल किला, कुतुब मीनार सहित कई पर्यटक स्थल हैं। यहां सालों भर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। अब जब कोरोना संकट के बाद लोग एक बार फिर से बाहर घूमने-फिरने के लिए निकलने लगे हैं तो दिल्ली में एक बार

Birla Temple Delhi: बिरला मंदिर, दिल्ली- जहां जाति-धर्म के नाम पर नहीं होता किसी से कोई भेदभाव

दिल वालों की दिल्ली में एक ऐसा मंदिर है जहां जाति-धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से विख्यात इस मंदिर को देश-दुनिया के लोग बिरला मंदिर के नाम से जानते हैं।

जल मंदिर पावापुरी: भगवान महावीर का निर्वाण स्थल, जहां उन्होंने दिया था पहला और अंतिम उपदेश

जल मंदिर पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। भगवान महावीर को इसी स्थल पर मोक्ष यानी निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। जैन धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र शहर है। बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास पावापुरी में यह जल मंदिर है। यह वही जगह है जहां भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला और आखिरी उपदेश दिया था। भगवान महावीर ने इसी जगह से विश्व को अहिंसा के साथ जिओ और जीने दो का संदेश दिया था।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां प्रतिदिन शयन करने आते हैं भोलेनाथ महादेव

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में चौथा है। मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर- ममलेश्वर महादेव के रूप में। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इंदौर से 77 किलोमीटर पर है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले नर्मदा नदी में स्नान कर ऊं के आकार में बने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

Contact Us

Work With Me FAM Trips, Blogger Meets या किसी भी तरह के collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें। Contact me at:- Email – guptagitendra [@] gmail.com Twitter – @GuptaHitendra Instagram – @GuptaHitendra Facebook Page – Hitendra Gupta

संसद भवन- आप भी जा सकते हैं यहां घूमने

देश के लोकतंत्र का मंदिर है देश का संसद भवन। यह दुनियाभर में सबसे आकर्षक संसद भवन है। इस भवन में देश की संसदीय कार्यवाही होती है। देश भर के लोकसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि यहीं पर चर्चा करते हैं और कानून बनाने का काम करते हैं। संसद सत्र के समय लोकसभा और राज्यसभा दोनों सनद के सदस्य कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं।