Skip to main content

सिर्फ 3 दिन में 7 महाद्वीप का सफर कर दो भारतीयों ने बना लिया घुमक्कड़ी का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

आमतौर पर वीकेंड के साथ एक-दो दिन और छुट्टी मिल जाए तो हम लोग तीन-चार दिन के लिए आसपास के टूरिस्ट पैलेस की ओर निकल पड़ते हैं। दिल्ली वाले दो-तीन दिन की छुट्टी में पहाड़ की ओर या फिर मथुरा-वृंदावन या जयपुर की ओर चल पड़ते हैं। इससे ज्यादा होता है तो हवाई जहाज से कुछ दूर तक चले जाते हैं। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत के दो घुमक्कड़ों ने सिर्फ तीन दिन में 7 महाद्वीप को लांघ दिया।

डॉ अली ईरानी और सुजॉय कुमार मित्रा नाम के दो भारतीयों ने सिर्फ 3 दिन में 7 महाद्वीप की यात्रा कर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स वालों ने भी इस घुमक्कड़ी को मान्यता प्रदान करते हुए सर्टिफिकेट दिया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे अपने वेबसाइट पर भी फोटो के साथ प्रकाशित किया है।


गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने लिखा है कि ईरानी और मित्रा ने सात महादेशों की यात्रा पूरी करने में कुल तीन दिन एक घंटे 5 मिनट और 4 सेकंड का समय लिया। वास्तव में यह एक बड़ा अनोखा रिकॉर्ड है। उन्होंने 7 दिसंबर 2022 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अपनी यात्रा पूरी की। उनकी यात्रा में एशिया से लेकर अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अंटार्कटिक और ओशिनिया शामिल हैं।

डॉ अली ईरानी और सुजॉय कुमार मित्रा 4 दिसंबर, 2022 को अंटार्कटिका से यात्रा शुरू कर 7 दिसंबर, 2022 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंचे थे। उन्होंने सिर्फ 73 घंटे में 7 महादेश की यात्रा कर जो अनोखा विश्व रिकॉर्ड बनाया है, उसकी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार ईरानी और मित्रा का मानना है कि रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं। आज हम एक रिकॉर्ड तोड़ने में सफल होते हैं, लेकिन कल कोई और हमारा रिकॉर्ड तोड़ देता है।


इससे पहले सबसे कम समय में 7 महाद्वीप की यात्रा तीन दिन, 14 घंटे, 46 मिनट, 48 सेकंड में पूरी की गई थी। ये रिकॉर्ड संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के डॉ खावला अल रोमाइथु के नाम था। लेकिन अब ये रिकॉर्ड दो भारतीय के नाम अंकित हो गए हैं।

डॉ अली ईरानी और सुजॉय कुमार मित्रा को शुरू से घूमने-फिरने का शौक रहा है। डॉ ईरानी इंडियन क्रिकेट टीम के फिजियोथेरेपिस्ट रह चुके हैं और 90 से ज्यादा देश घूम चुके हैं। जबकि सुजॉय कुमार मित्रा ट्रेवलिंग के बिजनेस में हैं और वे 192 में से 172 देश देख चुके हैं। इन दोनों का मानना है कि इससे लोगों को घर से बाहर निकल देश-विदेश घूमने की प्रेरणा मिलेगी।

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

-हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Popular posts from this blog

उत्तर प्रदेश के वे टॉप 10 पर्यटन स्थल, जहां गए बिना आपकी यात्रा नहीं होगी पूरी

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। उत्तर प्रदेश काफी खूबसूरत राज्य है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। भगवान राम की नगरी अयोध्या, भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन से लेकर भगवान बुद्ध से संबंधित सारनाथ और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों पर हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। महादेव की नगरी काशी, कुंभनगरी प्रयागराज से लेकर प्रेम प्रतीक की नगरी आगरा जैसे पर्यटक स्थल घुमक्कड़ों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बने हुए हैं। नजाकत, नफासत और तहजीब के शहर लखनऊ गए बिना तो जैसे आपकी यात्रा पूरी ही नहीं होगी। सभी फोटो- यूपी टूरिज्म नए साल में लोग फिर से घर से बाहर निकला शुरू कर दिए हैं। वे नई-नई जगहों पर जा रहे हैं तो ऐसे में आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के उन टॉप 10 पर्यटन स्थलों के बारे में जहां आप देश के किसी भी कोने से आसानी से पहुंच सकते हैं। 1. वाराणसी बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को बनारस या काशी के नाम से भी जानते हैं। काशी दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी के रूप में विख्यात है। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे का...

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।