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कैंची धाम: हनुमान जी के अवतार बाबा नीब करौरी के आश्रम में आते ही हो जाती हैं हर मुराद पूरी

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नीब करौरी बाबा...नाम सुनते ही शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। मन में असीम शांति का अनुभव होने लगता है। हर दुख-दर्द दूर होता दिखने लगता है। हालांकि बाबा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन कहीं से ये नहीं लगता कि वे पास नहीं हैं। हर पल-हर क्षण बाबा नीब करौरी आंखों के सामने नजर आने लगते हैं। बाबा जब दिल-दिमाग और जेहन में उतर जाए, तो फिर आपको भी इसी तरह का आभास होगा। ऐसा ही अनुभव और एहसास होगा। आप हर घड़ी बाबा को अपने साथ महसूस करेंगे और जब बाबा साथ हो तो चिंता किस बात की।  

ये हैं दिल्ली के टॉप 10 पर्यटक स्थल, नए साल में आप भी घूम आइए

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दिल्ली देश की राजधानी है। यहां हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटक आते हैं। दिल्ली में इंडिया गेट, लाल किला, कुतुब मीनार सहित कई पर्यटक स्थल हैं। यहां सालों भर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। अब जब कोरोना संकट के बाद लोग एक बार फिर से बाहर घूमने-फिरने के लिए निकलने लगे हैं तो दिल्ली में एक बार

दिल्ली में हैं तो नवरात्रि पर इन दुर्गा मंदिरों में जरूर जाइए

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दुर्गा पूजा तो वैसे बंगाल-बिहार का मशहूर है। लेकिन नवरात्रि के दौरान दिल्ली में एक अलग ही उमंग होता है। दिल्ली के लोग नवरात्र को काफी आनंद और उत्साह के साथ मनाते हैं। बड़े-बड़े पंडाल लगाए जाते हैं और रामलीला का मंचन भी होता है। दशहरा के दिन रावण वध देखने के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं। इस सबके बीच दिल्ली के कुछ दुर्गा मंदिर हैं, जिसकी हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के बीच काफी मान्यता है।

बिहार के प्रमुख पर्यटक स्थल सासाराम नहीं घूमे तो क्या घूमे!

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सासाराम बिहार का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है। यह रोहतास का जिला मुख्यालय है। यहाँ मंदिर, मकबरा, पहाड़ी, हरियाली से लेकर जलप्रपात तक वह सब कुछ है जो एक पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए चाहिए। बिहार के इस खूबसूरत सासाराम में एक से बढ़कर एक घूमने लायक पर्यटक स्थल हैं। यहाँ की हरियाली, पहाड़ी, किले और कल-कल बहती नदियों और झरनों के बीच आकर आप जिम कॉर्बेट और मसूरी- कैम्पटी झील को भूल जाएंगे। आपको विश्वास ही नहीं होगा कि हम बिहार में हैं और बिहार में इतनी खूबसूरत जगह भी है। यहाँ की खूबसूरती में आप खो जाएंगे।

बिहार के प्रमुख पर्यटल स्थल

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बिहार के बारे में जानकारी ना होने के कारण लोगों को काफी गलतफहमी है। इसमें मीडिया का भी बहुत बड़ा हाथ है। अखबार और न्यूज चैनलों में ज्यादातर निगेटिव खबरों के कारण लोग बिहार के बारे में सही से नहीं जानते। विहार... विहारों की भूमि बिहार से ही बौद्ध और जैन धर्म का पार्दुभाव हुआ। खालसा पंथ के संस्थापक सिखों के के दसवें और आखिरी गुरु श्री गुरुगोविंद सिंह देव जी का जन्म भी बिहार में हुआ। दुनिया को सबसे पहले लोकतंत्र बिहार ने ही दिया और दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालय का खंडहर आज भी विद्यमान है।

अप्रैल की गर्मी से राहत के लिए वीकेंड पर घूम आइए दिल्ली के पास की इन जगहों को

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इस बार दिल्ली में मार्च से ही भीषण गर्मी पड़ रही है। अप्रैल में जून की तपिश महसूस की जा रही है। इस बार दिल्ली में रिकॉर्डतोड़ गर्मी के बीच लोग कोरोना के बाद एक बार फिर घरों में बंद होने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में दिल्ली की गर्मी से राहत के लिए आप दिल्ली के पास इन तीन जगहों पर घूमने के लिए जा सकते हैं। पास होने के कारण आप इन जगहों पर आसानी से जा भी सकते हैं।

सर्दी का आनंद लेना हो तो घूम आइए पहाड़ों की रानी मसूरी

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दिल्ली से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मसूरी एक प्रमुख हिल स्टेशन है। मसूरी प्रकृति की गोद में बसा एक बेहद खूबसूरत शहर है। यह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से करीब 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देहरादून आने वाला हर पर्यटक यहां जरूर आता है। वैसे तो यहां गर्मी के मौसम में पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सर्दी के मौसम में भी यहां काफी घुमक्कड़ आते हैं। सर्दी में यहां का मौसम बहुत ही शानदार रहता है।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर: पुराण से भी पुराना है बाबा का धाम

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दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी वाराणसी में है भव्य श्री काशी विश्वनाथ मंदिर। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल काशी विश्वनाथ मंदिर को विश्वेश्वर नाम से भी जाना है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ अनादि काल से ही यहां विराज रहे हैं। इसीलिए आदिलिंग के रूप में अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है। मान्यता है कि महादेव शिव और माता पार्वती का यह आदि स्थान है।

उत्तर प्रदेश में लें सर्दियों का आनंद, ये हैं प्रदेश के सात सबसे सुहाने स्थल

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सर्दियों में घूमने का अपना एक अलग ही आनंद है। बारिश के बाद प्रकृति की खूबसूरती को निहारने के साथ अगर आप ठंड में ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के बीच सुहाने स्थलों में जाना चाहते हैं तो देश में उत्तर प्रदेश से बेहतर जगह नहीं मिलेगा। आप चाहे सोलो ट्रेवल करना पसंद करते हैं या सपरिवार, सर्दियों में यूपी के ये सात सुहाने स्थल आपके जीवन को सरगम से भर देंगे।  

अब चांदनी रात में फिर से करें ताजमहल का दीदार, एक साल बाद मिलेगा मौका

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चांदनी रात में ताजमहल का दीदार करने की चाहत रखने वाले पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। अब वे एक बार फिर से रात में ताज की खूबसूरती का दीदार कर सकेंगे। कोरोना के कारण ताजमहल को पिछले साल 17 मार्च, 2020 को बंद कर दिया गया था। कोरोना की पहली लहर में ताजमहल को 188 दिनों तक बंद रखने के बाद खोला गया, जबकि दूसरी लहर में 61 दिनों के बाद खोला गया। कोरोना के बाद भले ही ताजमहल को खोल दिया गया, लेकिन रात में दीदार की अनुमकि नहीं दी गई।

गुरु गोरखनाथ के भक्तों के लिए खुशखबरी, यूपी का अग्रणी पर्यटन केंद्र बनेगा बुंदेलखंड का गोरखगिरि

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गुरु गोरखनाथ के भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। बुंदेलखंड में महोबा स्थित गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली गोरखगिरि उत्तर प्रदेश का अग्रणी पर्यटन केंद्र बनेगा। नाथ संप्रदाय के प्रणेता गुरु गोरखनाथ के सपनों को साकार करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखगिरि पर्वत पर मंदिर, बाजार, रोप-वे, धर्मशाला, ध्यानकेंद्र बनवा रहे हैं। इसके साथ यहां गुरु गोरखनाथ की एक बड़ी भव्य प्रतिमा भी स्थापित होगी। इस पर करीब 25 करोड़ की लागत आएगी। करीब दो हजार फीट ऊंचे गोरखगिरि पर्वत पर सिद्ध बाबा मंदिर है। यहां गर्भगृह में गुरु गोरखनाथ की खड़ाऊं-चिमटा रखा हुआ है।

घुमक्कड़ों के लिए खुशखबरी, गुजरात का केवड़िया बनेगा इको फ्रेंडली पर्यटन स्थल

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गुजरात घूमने की ख्वाहिश रखने वाले पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है। गुजरात सरकार केवड़िया को इको फ्रेंडली टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर डेवलप कर रही है। 15 अगस्त से केवड़िया को ई-रिक्शा और ई-कार के लिए खोल दिया गया है। फिलहाल यहां 10 ई-रिक्शा और ई-कार शुरू किए गए हैं। 31 अक्तूबर से यहां सिर्फ ई वाहन ही चलेंगे। 31 अक्तूबर के बाद यहां डीजल- पेट्रोल की गाड़ियां नहीं चलेंगी। इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त करने पर काम हो रहा है। पर्यटकों के लिए यहां ई-बस भी चलाए जाएंगे।

श्रद्धालुओं के लिए खुला पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का पट, जानिए क्यों खास है यह मंदिर

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ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का पट 16 अगस्त से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। 16 से 22 अगस्त तक सिर्फ पुरी के निवासी ही भगवान के दर्शन कर पाएंगे। 23 अगस्त के बाद यहां आने वाले सभी श्रद्धालु भगवान श्री जगन्नाथ का दर्शन कर पाएंगे। मंदिर में आप सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक भगवान के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं को कोरोना दिशानिर्देशों के तहत मास्क, सैनिटाइजर का इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा। राज्य से बाहर के लोगों को 96 घंटे के भीतर वाला आरटी-पीसीआर टेस्ट या कोविड-वैक्सीनेसन का सर्टिफिकेट दिखाना होगा।

दशरथ मांझी स्मारक: प्यार के लिए चीर दिया पहाड़ का सीना

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दशरथ मांझी एक ऐसा शख्स, एक ऐसा नाम जिसने प्यार के लिए पहाड़ का सीना चीर दिया। माउंटेन मैन के नाम से मशहूर दशरथ मांझी बिहार में गया से करीब 31 किलोमीटर दूर गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे। गहलौर गांव के आसपास का इलाका काफी पिछड़ा है और आज से 50-60 साल पहले तो यहां की स्थिति काफी खराब थी। लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नहीं थी। गांव में ना बिजली ना पानी, इलाज के लिए के कारण पहाड़ी से घिरे अत्री ब्लॉक के उनके गांव के लोगों को नजदीकी 15 किलोमीटर दूर के वजीरगंज शहर जाने के लिए करीब 50-60 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। ऐसे में सिर्फ एक हथौड़ा और छेनी से अकेले 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काट कर 360 फुट लंबी और 30 फुट चौड़ी सड़क बना डाली। माउंटेन मैन दशरथ मांझी ने अपने जुनून के कारण करीब 22 साल की मेहनत के बाद अत्री से वजीरगंज की दूरी को 50-60 से 15 किलोमीटर कर दिया। दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर रास्ता निकालने का प्रण तब लिया जब साल 1959 में उनकी पत्नी पहाड़ पार करने के क्रम में गिर गईं। समय पर दवा-पानी ना मिलने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके बाद से दशरथ मांझी ने ठान लिया कि इस पहाड़ी के...

सुजाता गढ़ स्तूप: यहीं भक्त सुजाता से खीर खाकर भगवान बुद्ध को हुई थी ज्ञान का प्राप्ति

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बिहार के गया में निरंजना नदी के किनारे बकरौर गांव में स्थित सुजाता गढ़ बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल है। यह जगह धार्मिक के साथ पुरातात्विक दृष्टि से भी काफी महत्‍वपूर्ण है। खुदाई के दौरान यहां भगवान बुद्ध की विशाल खंडित प्रतिमा और भगवान विष्णु की एक फीट ऊंची काले प्राचीन पत्थर की प्रतिमा मिली थी। यहां खुदाई में पाल वंश कालीन अभिलेख और प्रतिमा मिले हैं। यहां मिले स्तूप का व्यास 150 फीट और ऊंचाई 50 फीट है। बताया जाता है कि इस स्तूप का निर्माण सम्राट अशोक ने करवाया था।

पटना का रिवरफ्रंट गांधी घाट, वीकेंड पर शांति के बीच शाम में लीजिए गंगा आरती का आनंद

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पटना में एक बेहद खूबसूरत जगह है- गांधी घाट। इसे आप पटना का रिवरफ्रंट भी कह सकते हैं।  गंगा नदी के किनारे पटना में कई घाट है, लेकिन सबसे लोकप्रिय घाट है गांधी घाट। इस घाट का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है। यहां गांधीजी की अस्थियां विसर्जित होने के कारण इसका नाम गांधी घाट रखा गया है। इसलिए इस घाट का एक ऐतिहासिक महत्व भी है।