Skip to main content

वाराणसी यानी बनारस यानी दुनिया का सबसे प्राचीन और जीवंत शहर

वरुना और असि नदी के संगम पर बसा शहर वाराणसी... यानी बनारस... यानी वह शहर जहां जीवन में हर वक्त रस बना रहता है। जीवन मस्त रहता है। गंगा किनारे स्थित बाबा भोलेनाथ ही यह नगरी दुनिया भर में काशी नाम से भी विख्यात है। लोग यहां पवित्र गंगा में डुबकी लगाने आते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां डुबकी लगाने से सारे पाप और कष्ट नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही यहां मृत्यु प्राप्त होने और अंतिम संस्कार होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।  

वाराणसी हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध और जैन धर्म के लोगों के लिए भी एक प्रमुख केंद्र रहा है। यह प्राचीन काल से ही शिक्षा, धर्म, दर्शन, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, गीत-संगीत, कला-साहित्य और आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है। वाराणसी के ही पास सारनाथ में भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। इसके साथ ही यह चार जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली भी है।

कहावत में सुबह-ए-बनारस और शाम-ए-अवध कहा गया है। यानी अगर वाराणसी की खूबसूरती को देखना है तो यहां के सुबह को देखिए। सुबह उठकर गंगा किनारे जाइए और सूर्य को उगते हुए देखिए। इस अद्भुत दृश्य को देखकर आपको एक अलग ही अनुभव होगा। सुबह-सुबह गंगा स्नान कर मंदिर में दर्शन करने जाते समय सारा माहौल भक्तिमय रहता है। पूरा इलाका शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और मंत्रो के उच्चारण से गूंजायमान रहता है।

वाराणसी को घाटों का शहर भी कहा जाता है। यहां करीब 84 घाट हैं। बताया जाता है कि वाराणसी अकेला शहर है जहां इतने घाट हैं। इन घाटों में दशाश्वमेध घाट सबसे प्रसिद्ध घाट है। बताया जाता है कि यहां पर भगवान ब्रह्मा ने दस अश्वों की बलि दी थी। यहां हर शाम गंगा आरती होती है और यह घाट गंगा आरती के लिए सबसे लोकप्रिय है। यह घाट बाबा विश्वनाथ मंदिर के पास है। आप यहां स्नान कर बाबा के दर्शन के लिए जा सकते हैं।

दशाश्वमेध घाट के बाद मणिकर्णिका घाट सबसे प्रसिद्ध है। यहां लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। यहां सालों भर चौबीसों घंटे चिता चलती रहती हैं। यह दशाश्वमेध घाट और सिंधिया घाट के बीच है। अंत्येष्टि किए एक और घाट है हरीशचंद्र घाट। यह काशी का सबसे प्राचीन घाट है। इसका नाम राजा हरीशचंद्र के नाम पर रखा गया है। घाटों के आखिर में अस्सी घाट स्थित है। यहां पर गंगा का अस्सी नदी से संगम होता है।

यहां आने वाले लोग या पर्यटक गंगा स्नान और बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद नौका विहार जरूर करते हैं। नाव से आप वाराणसी के सभी घाटों को देख सकते हैं। इस दौरान तरह-तरह के घाटों को देखकर दंग रह जाएंगे। गंगा किनारे घाट पर कई लोग योग तो कई संगीत का रियाज करते मिल जाएंगे। और शाम में तो गंगा आरती के समय दीपों से चमचमाते घाटों के देख सकते हैं।

नाव से आप गंगा किनारे विहार करते हुए एक मिनी भारत का दर्शन कर सकते हैं। यहां आपको सभी रंग देखने को मिल जाएंगे। सुबह स्नान के साथ जीवन की शुरुआत से लेकर अंतिम संस्कार तक सभी चक्र यहीं देखने को मिल जाते हैं। जीवन-मरण के सारे तत्व, सारे रंग एक साथ देखकर आप मानव जीवन के सही मायने को समझने की कोशिश करने लगते हैं।

विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी में गंगा स्नान के बाद सभी हिंदू श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ मंदिर जरूर जाते हैं। इस काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर सोने की परत चढ़ी हुई है। यह हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। इस लिए हिंदू धर्म में काशी विश्वनाथ मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर के दिव्य दर्शन मात्र से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इसके पास ही अन्नपूर्णा मंदिर, दुंडीराज विनायक और ज्ञानवापी हैं।

काल भैरव मंदिर

भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल यानी वाराणसी का रक्षक माना जाता है। बनारस आने वाले श्रद्धालु पहले भगवान काल भैरव का दर्शन करते हैं फिर उनसे अनुमति लेकर शहर में स्थित अन्य स्थानों का दर्शन करने जाते हैं। यहां तक ही यहां आने वाले अधिकारी भी कुर्सी पर बैठने से पहले काल भैरव की इजाजत लेते हैं।

तुलसी मानस मंदिर
बताया जाता है कि रामचरितमानस के रचियता गोस्वामी तुलसीदास की याद में इस तुलसी मानस मंदिर का निर्माण किया गया है। संगमरमर से बना यह मंदिर काफी सुंदर है। इसकी दीवारों पर रामचरितमानस के छंद और दृश्य उकेरे गए हैं। लोगों का कहना है कि वाराणसी में 20 हजार से भी अधिक मंदिर हैं।
 
संकट मोचन मंदिर
यह मंदिर संकट मोचन भगवान हनुमान को समर्पित है। नौका विहार के बाद यहां आकर आप बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जा सकते हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर को गोस्वामी तुलसीदास ने स्थापित किया था और यहां महावीर हनुमान भगवान के दर्शन मात्र से से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। यहां मंगलवार और शनिवार को काफी भीड़ रहती है।

सभी फोटो अतुल्य भारत
वाराणसी शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है। यहां चार बड़े विश्वविद्यालय बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइयर टिबेटियन स्टडीज और संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में एक है। करीब 1,300 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय को साल 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनाया था

बीएचयू देश के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक है। यहां 30 हजार से अधिक छात्र रहते हैं। बीएचयू में बिरला मंदिर भी है। यहां भारत कला भवन संग्रहालय भी है। बनारस आने लोग यहां भी घूमने जरूर आते हैं। बीएचयू के पास महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में स्थित है भारत माता मंदिर। यहां भारत माता की आराधना की जाती है।

वाराणसी आने पर आप भेलूपुर में पार्श्वनाथ जैन मंदिर भी जा सकते हैं। यह जैन धर्म के लोगों के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल है। आप यहां से 10 किलोमीटर दूर बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल सारनाथ देखने जा सकते हैं। इसके साथ आप गंगा नदी के पूर्वी किनारे पर रामनगर किला भी जा सकते हैं।

काशी-बनारस आने वाले लोग यहां सुबह में कचौड़ी सब्जी के साथ शाम में चाट खाना नहीं भूलते हैं। यहां का बनारसी पान तो पूरी दुनिया में फेमस है ही। लोग यहां दिन में गाढ़ी मलाई वाली लस्सी पीकर मस्त हो जाते हैं। यहां के लोग मीठा भी काफी पसंद करते हैं। इसलिए खाने के बाद कोई ना कोई मिठाई जरूर लेते हैं।

वाराणसी बनारसी साड़ी का भी एक प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले पर्यटक कम से कम एक बनारसी साड़ी जरूर ले जाते हैं। इसके अलावा वाराणसी पीतल, तांबे के बर्तनों, लकड़ी के खिलौनों और सोने के गहनों के लिए भी प्रसिद्ध है। खरीदारी के लिए गोदौलिया मार्केट, चौक, विश्वनाथ गली और ठठेरा मार्केट काफी लोकप्रिय है। 

यह पोस्ट #BlogchatterA2Z 2021 चैलेंज के तहत लिखा गया है। आप भी इस ब्लॉगचैटरएटूजेड चैलेंज में हिस्सा ले सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए क्लिक करें- Blogchatter

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

-हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Popular posts from this blog

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां प्रतिदिन शयन करने आते हैं भोलेनाथ महादेव

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में चौथा है। मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर- ममलेश्वर महादेव के रूप में। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इंदौर से 77 किलोमीटर पर है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले नर्मदा नदी में स्नान कर ऊं के आकार में बने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

Birla Temple Delhi: बिरला मंदिर, दिल्ली- जहां जाति-धर्म के नाम पर नहीं होता किसी से कोई भेदभाव

दिल वालों की दिल्ली में एक ऐसा मंदिर है जहां जाति-धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से विख्यात इस मंदिर को देश-दुनिया के लोग बिरला मंदिर के नाम से जानते हैं।

संसद भवन- आप भी जा सकते हैं यहां घूमने

देश के लोकतंत्र का मंदिर है देश का संसद भवन। यह दुनियाभर में सबसे आकर्षक संसद भवन है। इस भवन में देश की संसदीय कार्यवाही होती है। देश भर के लोकसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि यहीं पर चर्चा करते हैं और कानून बनाने का काम करते हैं। संसद सत्र के समय लोकसभा और राज्यसभा दोनों सनद के सदस्य कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं।

Contact Us

Work With Me FAM Trips, Blogger Meets या किसी भी तरह के collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें। Contact me at:- Email – guptagitendra [@] gmail.com Twitter – @GuptaHitendra Instagram – @GuptaHitendra Facebook Page – Hitendra Gupta

जल मंदिर पावापुरी: भगवान महावीर का निर्वाण स्थल, जहां उन्होंने दिया था पहला और अंतिम उपदेश

जल मंदिर पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। भगवान महावीर को इसी स्थल पर मोक्ष यानी निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। जैन धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र शहर है। बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास पावापुरी में यह जल मंदिर है। यह वही जगह है जहां भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला और आखिरी उपदेश दिया था। भगवान महावीर ने इसी जगह से विश्व को अहिंसा के साथ जिओ और जीने दो का संदेश दिया था।

उत्तर प्रदेश के वे टॉप 10 पर्यटन स्थल, जहां गए बिना आपकी यात्रा नहीं होगी पूरी

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। उत्तर प्रदेश काफी खूबसूरत राज्य है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। भगवान राम की नगरी अयोध्या, भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन से लेकर भगवान बुद्ध से संबंधित सारनाथ और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों पर हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। महादेव की नगरी काशी, कुंभनगरी प्रयागराज से लेकर प्रेम प्रतीक की नगरी आगरा जैसे पर्यटक स्थल घुमक्कड़ों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बने हुए हैं। नजाकत, नफासत और तहजीब के शहर लखनऊ गए बिना तो जैसे आपकी यात्रा पूरी ही नहीं होगी। सभी फोटो- यूपी टूरिज्म नए साल में लोग फिर से घर से बाहर निकला शुरू कर दिए हैं। वे नई-नई जगहों पर जा रहे हैं तो ऐसे में आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के उन टॉप 10 पर्यटन स्थलों के बारे में जहां आप देश के किसी भी कोने से आसानी से पहुंच सकते हैं। 1. वाराणसी बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को बनारस या काशी के नाम से भी जानते हैं। काशी दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी के रूप में विख्यात है। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे का

Hanuman Temple Delhi: दिल्ली के इस मंदिर में तुलसीदास जी ने की थी हनुमान चालीसा की रचना

दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित है प्राचीन हनुमान मंदिर। मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रहती है। हनुमान जयंती को भी यहां भारी भीड़ जुटती है। इस हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह महाभारत काल का मंदिर है और हस्तिनापुर से अलग इंद्रप्रस्थ बसाने के क्रम में ही पांडवों ने इस मंदिर को बनाया था।