Skip to main content

दुनिया के सबसे खूबसूरत मंदिरों में से एक है दिल्ली का लोटस टेंपल, यहां पूजा नहीं प्रार्थना होती है

दिल्ली में कालकाजी मंदिर, नेहरू प्लेस के पास है लोटस टेंपल। कमल की तरह बने होने के कारण दुनिया भर के लोग इसे लोटस टेंपल के नाम से जानते हैं। बहाई धर्म के लोगों के इस उपासना स्थल को बहाई उपासना मंदिर भी कहते हैं। हालांकि यह बहाई धर्म के लोगों का उपासना स्थल है, लेकिन यहां सभी धर्म के लोग प्रार्थना करते हैं। यहां सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों के लेख का पाठ किया जाता है। इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और यहां कोई पूजा-पाठ भी नहीं की जाती है। लोग यहां आकर शांति से ध्यान लगाकर प्रार्थना करते हैं।



कमल की आकृति में बना यह मंदिर दुनिया के सबसे खूबसूरत और भव्य मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का डिजाइन वास्तुकार फरीबर्ज सहबा ने तैयार किया था। इस मंदिर के बनाने में नौ अंक का बहुत अधिक महत्व दिया गया है। बहाई लोगों का मानना है कि चूंकि नौ सबसे बड़ा अंक है, इसलिए यह विस्तार, एकता और अखंडता का प्रतीक है। इसलिए इस मंदिर में नौ द्वार और नौ कोने हैं। मंदिर चारों ओर से नौ बड़े तालाबों से घिरा है। कमल के फूल की तीन क्रम में नौ-नौ कर कुल 27 पंखुड़ियां हैं।


इस मंदिर को बनाने के लिए 1956 में जमीन खरीदी गई थी और उसी समय नींव डाली गई थी। 1980 में मंदिर का निर्माण शुरू किया गया और यह 1986 तक चला। 26 एकड़ में बने इस मंदिर का उद्घाटन 24 दिसंबर, 1986 को किया गया। यहां प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं। यहां आनेवाले सभी पर्यटकों को बहाई धर्म के बारे में बताया जाता है और बहाई धार्मिक सामग्री दी जाती है।


बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह हैं। उनका जन्म ईरान में  सन 1817 में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने अपना जीवन अत्याचार-पीड़ितों, बीमारों और गरीबों की सेवा में लगा दिया। उन्नीसवीं सदी के मध्य में उन्होंने एक नए बहाई धर्म की स्थापना की। उस वक्त भी उनके विचार अत्यंत आधुनिक और क्रांतिकारी थे। सन 1892 में उनका स्वर्गारोहण हो गया। बहाउल्लाह की शिक्षा 1872 में जमाल एफेन्दी के जरिए भारत पहुंची। आज भारत में बहाईयों की संख्या बीस लाख से भी अधिक है।


बहाई अनुयायी यह मानते हैं कि सभी धर्मों की नींव एक है। बहाई लोग प्रार्थना और भक्ति की भावना को सभी लोगों की भलाई के लिए किए जाने वाला काम समझते हैं। बहाई उपासना मंदिर में सभी धर्मों के लोग प्रार्थना, ध्यान और जाप करने के लिए आते हैं। बहाई लेखों में कहा गया है कि दुनिया के सभी धर्म एक ही दिव्य स्रोत से निकले हैं। उनके मूल सिद्धांत एक-दूसरे से तालमेल में होते हैं और उनकी शिक्षाएं एक ही सत्य के पहलू हैं। इस हिसाब से यह मंदिर अनेकता में एकता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।


प्रार्थना समय

मंदिर में रोज सुबह 10 बजे, दोपहर 2 बजे व 3 बजे और शाम 5 बजे प्रार्थना सेवा का समय होता है। इस समय 10-15 मिनट तक विभिन्न पवित्र ग्रंथों का पाठ किया जाता है। इस समय एकदम से पिन ड्रॉप साइसेंस का माहौल होता है। प्रार्थना कक्ष में शांति बनाए रखने के लिए प्रार्थना तक कक्ष के गेट को बंद कर दिया जाता है। प्रत्येक प्रार्थना सेवा १०-१५ मिनट की होती है।


सूचना केंद्र-

इस उपासना मंदिर में रोज हजारों पर्यटक आते हैं। यहां आकर इसकी खूबसूरती को देखकर उनमें इसके बारे में और बहुत कुछ जानने की लालसा उठने लगती है। वे बहाई धर्म के बारे में भी जानना चाहते हैं इसके लिए यहां एक सूचना केंद्र बनाया गया है। यहां आपको बहाई उपासना मंदिर और बहाई धर्म के बारे में सारी जानकारियां मिल जाएंगी।


सूचना केंद्र में 400 से ज्यादा लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक विशाल ऑडिटोरियम और दो 70 सीटर ऑडिटोरियम भी हैं। यहां बहाई उपासना मंदिर और बहाई धर्म के बारे में फिल्में दिखाई जाती हैं। इसके साथ ही यहां कई तरह के कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। यह सूचना केंद्र सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से 12 बजे तक और शाम में 2 बजे से 5 बजे तक खुला रहता है। यहां एक पुस्तकालय भी है जिसमें 111 भाषाओं में 2000 से भी अधिक बहाई साहित्य का संग्रह है।


ध्यान रखें-

प्रार्थना कक्ष में जूते-चप्पल पहन कर नहीं जा सकते। मंदिर में प्रवेश से पहले आप अपने जूते-चप्पल ’जूताघर’ में जमा कर सकते हैं।
मेन गेट पर ह्वीलचेयर की सुविधा भी उपलब्ध है।
मंदिर परिसर में खाने-पीने की चीज ले जाने की अनुमति नहीं है।
यहां भारी सामान या बैग लेकर जाने की अनुमति नहीं है।
प्रार्थना कक्ष और सूचना केंद्र में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। इसे छोड़कर अन्य जगहों पर आप फोटोग्राफी कर सकते हैं।


कैसे पहुंचें?

लोटस टेंपल कालकाजी- नेहरू प्लेस के पास स्थित है। देश के किसी भी हिस्से से दिल्ली पहुंच आप यहां आसानी से आ सकते हैं।

मेट्रो से-
कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन मंदिर का सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन है। यहां से आप पैदल मंदिर पहुंच सकते हैं।

बस से-
नेहरू प्लेस नजदीकी बस अड्डा है। यहां से दिल्ली के किसी भी इलाके सा आ सकते हैं।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से-
लोटस मंदिर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से आप बस, मेट्रो, ऑटो या टैक्सी से आ सकते हैं।

एयरपोर्ट से-
बहाई उपासना मंदिर इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से करीब 17 किलोमीटर दूर है। यहां से भी आप बस, मेट्रो, ऑटो या टैक्सी से पहुंच सकते हैं।


कब पहुंचे-

लोटस टेंपल दिल्ली में है और यहां गर्मी के साथ सर्दी भी जबरदस्त पड़ती है। इसलिए यहां फरवरी से मार्च और सितंबर से नवंबर के बीच आना घूमने के लिए अच्छा रहता है। इस समय आप ज्यादा इंज्वॉय कर सकते हैं। 

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

-हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Popular posts from this blog

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां प्रतिदिन शयन करने आते हैं भोलेनाथ महादेव

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में चौथा है। मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर- ममलेश्वर महादेव के रूप में। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इंदौर से 77 किलोमीटर पर है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले नर्मदा नदी में स्नान कर ऊं के आकार में बने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

Birla Temple Delhi: बिरला मंदिर, दिल्ली- जहां जाति-धर्म के नाम पर नहीं होता किसी से कोई भेदभाव

दिल वालों की दिल्ली में एक ऐसा मंदिर है जहां जाति-धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से विख्यात इस मंदिर को देश-दुनिया के लोग बिरला मंदिर के नाम से जानते हैं।

संसद भवन- आप भी जा सकते हैं यहां घूमने

देश के लोकतंत्र का मंदिर है देश का संसद भवन। यह दुनियाभर में सबसे आकर्षक संसद भवन है। इस भवन में देश की संसदीय कार्यवाही होती है। देश भर के लोकसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि यहीं पर चर्चा करते हैं और कानून बनाने का काम करते हैं। संसद सत्र के समय लोकसभा और राज्यसभा दोनों सनद के सदस्य कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं।

Contact Us

Work With Me FAM Trips, Blogger Meets या किसी भी तरह के collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें। Contact me at:- Email – guptagitendra [@] gmail.com Twitter – @GuptaHitendra Instagram – @GuptaHitendra Facebook Page – Hitendra Gupta

जल मंदिर पावापुरी: भगवान महावीर का निर्वाण स्थल, जहां उन्होंने दिया था पहला और अंतिम उपदेश

जल मंदिर पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। भगवान महावीर को इसी स्थल पर मोक्ष यानी निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। जैन धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र शहर है। बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास पावापुरी में यह जल मंदिर है। यह वही जगह है जहां भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला और आखिरी उपदेश दिया था। भगवान महावीर ने इसी जगह से विश्व को अहिंसा के साथ जिओ और जीने दो का संदेश दिया था।

उत्तर प्रदेश के वे टॉप 10 पर्यटन स्थल, जहां गए बिना आपकी यात्रा नहीं होगी पूरी

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। उत्तर प्रदेश काफी खूबसूरत राज्य है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। भगवान राम की नगरी अयोध्या, भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन से लेकर भगवान बुद्ध से संबंधित सारनाथ और कुशीनगर जैसे धार्मिक स्थलों पर हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। महादेव की नगरी काशी, कुंभनगरी प्रयागराज से लेकर प्रेम प्रतीक की नगरी आगरा जैसे पर्यटक स्थल घुमक्कड़ों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बने हुए हैं। नजाकत, नफासत और तहजीब के शहर लखनऊ गए बिना तो जैसे आपकी यात्रा पूरी ही नहीं होगी। सभी फोटो- यूपी टूरिज्म नए साल में लोग फिर से घर से बाहर निकला शुरू कर दिए हैं। वे नई-नई जगहों पर जा रहे हैं तो ऐसे में आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के उन टॉप 10 पर्यटन स्थलों के बारे में जहां आप देश के किसी भी कोने से आसानी से पहुंच सकते हैं। 1. वाराणसी बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को बनारस या काशी के नाम से भी जानते हैं। काशी दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी के रूप में विख्यात है। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे का

Hanuman Temple Delhi: दिल्ली के इस मंदिर में तुलसीदास जी ने की थी हनुमान चालीसा की रचना

दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित है प्राचीन हनुमान मंदिर। मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रहती है। हनुमान जयंती को भी यहां भारी भीड़ जुटती है। इस हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह महाभारत काल का मंदिर है और हस्तिनापुर से अलग इंद्रप्रस्थ बसाने के क्रम में ही पांडवों ने इस मंदिर को बनाया था।