Skip to main content

लाल किला: आखिर इस महल के बारे में आप क्या और कितना जानते हैं?

लाल किला दुनिया के सबसे प्रभावशाली महलों में से एक है। सभी देशवासी जानते हैं कि देश के प्रधानमंत्री हर साल यहां 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। लाल किले के प्राचीर से हर 15 अगस्त को होने वाले इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को हम सब देखते हैं। लेकिन लालकिले के बारे में आप इससे ज्यादा क्या जानते हैं।


लाल बलुआ पत्‍थरों से बना होने के कारण इस किले का नाम लाल किला पड़ा। करीब 33 मीटर ऊंची दीवारों वाला यह किला देश के भव्य इतिहास का गवाह है। विकिपीडिया के अनुसार लालकिला पहले लालकोट था। बारहवीं सदी में यहां पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी। मुगल सम्राट शाहजहां ने पृथ्वीराज चौहान के इस लालकोट पर कब्जा पर लालकिले का पुनर्निर्माण कराया था। इसका पुनर्निर्माण 1638 में शुरू होकर 1648 में पूरा हुआ था।
शाहजहां ने आगरा से दिल्ली राजधानी शिफ्ट करने के लिए लालकोट का पुनर्निर्माण कर इसे बनाया था। इसकी वास्तुकला इस्लामिक, फारसी और हिंदू शैलियों का शानदार मिश्रण है। लालकिले की दीवार करीब ढाई किलोमीटर लंबी है। यह अपने आप में भारतीय इतिहास और उसकी कलाओं को समेटे हुए हैं। यूनेस्को ने 2007 में इसे विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल कर लिया था।

लाल किले में प्रवेश के लिए दो द्वार हैं- लाहौरी गेट और दिल्ली गेट। पर्यटक जिस द्वार से प्रवेश करते हैं उसे लाहौरी गेट कहते हैं। इसके भीतर जाने पर सुरक्षा जांच कक्ष और बाजार बने हुए हैं। इसे छत्ता चौक कहते हैं। किले में रहने वाली महिलाएं यहां खरीदारी करती थी। यहां आज की कई दुकानें हैं। यहां आप हस्तशिल्प के सामान के साथ लुभावने चीजों को खरीद सकते हैं।
छत्ता चौक से भीतर जाते ही लालकिले का पूरा परिसर नजर आता है। अंदर जाते ही लेफ्ट साइड में प्राचीन काल में बनाए गए सैन्य बैरक हैं। 1857 की लड़ाई के बाद इन बैरकों में अंग्रेजी सैनिक रहते थे। देश आजाद होने पर भारतीय सेना के जवान यहां रहने लगे। लेकिन साल 2003 में सेना से इसे खाली कर दिया। अब यहां म्यूजियम बना दिया गया है।

लालकिले के 256 एकड़ में फैले परिसर के अंदर पर्यटकों के देखने लायक जगहों में दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, रंग महल, नौबत खाना, मुतम्मन बुर्ज, मोती मस्जिद और म्यूजियम शामिल हैं-

नौबत खाना
नौबत यानी नक्‍कार खाना भीतर जाते ही लेफ्ट में है जो लाहौरी गेट के पीछे की तरफ है। यहां दिन में पांच बार शाही बैंड बजाया जाता था। इसका इस्तेमाल शुभ अवसरों पर संगीत बजाने के लिए होता था। यह किसी मेहमान के महल में प्रवेश का संकेत भी देता था। यह एक तीन मंजिला भवन है और ऊपरी मंजिल पर वार मेमोरियल म्यूजियम बनाया गया है।

दीवान-ए-आम
नौबत खाने के सामने एक खुला मैदान है। सामने दीवान-ए-आम है। यहां मुगल बादशाह दरबार लगाते थे और आम लोगों के साथ खास मेहमानों से भी मिलते थे। मेहराबों और 9 द्वारों वाला संगमरमर से बना यह दीवान ए आम काफी खूबसूरत है। आयताकार रूप में बनाए गये इस दीवान-ए-आम में काफी सुंदर पच्चीकारी की गई है। दीवारों पर फूलों और पक्षियों को बनाया गया है।


दीवान-ए-खास

यह शाही निजी सभागार है। यह तराशे गए स्‍तंभों से निकले मेहराबों के गलियारों से घिरा हुआ है। इन स्तंभों को कापी बारीकी से तराशा गया है। यह सफेद संगमरमर का बना हुआ मंडप है। यहां मंत्रियों की बैठक होती थी। मुगल शासक यहां अपने निजी मेहमानों से मिलते थे।

मुमताज महल और रंग महल
लालकिले में महिलाओं के लिए दो महल बनाए गए थे- मुमताज महल और रंग महल। इन महलों में किले की अंदर की महिलाएं रहती थी। बताया जाता है कि यहां से यमुना नदी की नहर-ए-बिहिश्‍त बहती थी। नहर-ए-बिहिश्‍त का मतलब होता है जन्नत की नदी। इस नहर से यमुना नदी के पानी को किले के अंदर पहुंचाया जाता था। इसके साथ ही एक बड़ा हॉल रंग महल का है। यहां की दीवारों को काफी खूबसूरती के साथ बनाए गए हैं। यहां मुगल काल की वस्तुओं को एक म्यूजियम में रखा गया है।


खास महल

लाल किले का आंदर खास महल राजा का निजी क्षेत्र था। यहां बादशाह खुद रहा करते थे। इसमें शाही कक्ष और प्रार्थना कक्ष बने हुए थे।

मोती मस्‍जिद
लालकिला में सफेद संगमरमर से बनी एक छोटी-सी मोती मस्‍जिद है। इसे औरंगजेब ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए किया था।


लाल किला में हर शाम लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है। इस शो में एक घंटे के दौरान मुगल साम्राज्य और लालकिले के इतिहास को बताया जाता है। इस शो को अमिताभ बच्चन ने आवाज दी है।

लाल किला सुबह साढ़े नौ बजे से शाम के साढ़े चार बजे तक खुला रहता है। यह सोमवार को बंद रहता है। दिल्ली के ज्यादातर पर्यटन स्थल सोमवार को बंद रहते हैं। दिल्ली घूमने का प्लान बनाते समय इस चीज का खास ध्यान रखें। यहां भारतीय और सार्क देशों के पर्यटकों के लिए 35 रूपए टिकट लगता है। जबकि अन्य देशों के लोगों के लिए 550 रूपए लिए जाते हैं। 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए कोई टिकट नहीं लगता है।

सभी फोटो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण

कैसे पहुंचे-

लाल किला दिल्ली के सभी हिस्सों से बढ़िया तरीके से जुड़ा हुआ है। यहां आने में किसी को कोई परेशानी नहीं होगी। यह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास है। लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पास है। आप दिल्ली के किसी भी इलाके से यहां बस से भी पहुंच सकते हैं।

कब पहुंचे-
यहां आप किसी भी समय आ सकते हैं, लेकिन गर्मी और सर्दी में आप यहां परेशान हो सकते हैं। गर्मी में यहां सुबह और शाम के समय आ सकते हैं। वैसे फरवरी-मार्च और सितंबर से नवंबर तक का समय दिल्ली घूमने के लिए बेहतर रहता है। शाम में यहां लाइट एंड साउंड शो का आनंद ले सकते हैं। मजा आएगा।

घूमने लायक नजदीकी स्थल
लाल किले के पास ही में दिगंबर जैन लाल मंदिर और गौरी शंकर मंदिर है। आप लाल किले के पास चांदनी चौक, गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, फतेहपुरी मस्जिद, जामा मस्जिद देख सकते हैं। खरीदारी करने वालों और खाने-पीने के शौकिनों के लिए तो यह इलाका स्वर्ग ही है। आप यहां चांदनी चौक, लाला लाजपतराय मार्केट, नई सड़क, खारी बावली में मन लायक खरीदारी कर सकते हैं। चांदनी चौक में चाट, छोले भटूरे, जलेबी और पराठे का लुत्फ उठा सकते हैं। गर्मी में यहां लस्सी का आनंद ले सकते हैं।

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

-हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Popular posts from this blog

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

Contact Us

Work With Me FAM Trips, Blogger Meets, Product Launch Events, Product Review या किसी भी तरह के collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें। Contact me at:- Email – guptagitendra [@] gmail.com Twitter – @GuptaHitendra Instagram – @GuptaHitendra Facebook – GuptaHitendra

अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली: जहां जाने पर आपको मिलेगा स्वर्गिक आनंद

दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित स्वामीनारायण मंदिर अपनी वास्तुकला और भव्यता के लिए दुनियाभर में मशहूर है। करीब 100 एकड़ में फैला यह अक्षरधाम मंदिर दुनिया के सबसे बड़े मंदिर परिसर के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल है। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। इस मंदिर को बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) की ओर से बनाया गया है। इसे आम भक्तों- श्रद्धालुओं के लिए 6 नवंबर, 2005 को खोला गया था।

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां प्रतिदिन शयन करने आते हैं भोलेनाथ महादेव

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में चौथा है। मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर- ममलेश्वर महादेव के रूप में। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इंदौर से 77 किलोमीटर पर है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले नर्मदा नदी में स्नान कर ऊं के आकार में बने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

हिंद-इस्लामी वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण शेरशाह सूरी का मकबरा

शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार रोहतास जिले के सासाराम में है। शेरशाह का यह मकबरा एक विशाल सरोवर के बीचोंबीच लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। शेरशाह ने अपने जीवनकाल में ही इस मकबरे का निर्माण शुरू कर दिया था, लेकिन पूरा उसके मृत्यु के तीन महीने बाद ही हो पाया। शेरशाह की मौत 13 मई, 1545 को कालिंजर किले में हो गई थी और मकबरे का निर्माण 16 अगस्त, 1545 को पूरा हुआ। शेरशाह के शव को कालिंजर से लाकर यहीं दफनाया गया था। इस मकबरे में 24 कब्रें हैं और शेरशाह सूरी की कब्र ठीक बीच में है।

About Us

Hitendra Gupta ट्रेवल ब्लॉगर, मीडिया प्रोफेशनल, डिजिटल इन्फ्लुएंसर और प्रकृति प्रेमी शाकाहारी मैथिल

उज्जैन- पृथ्वी का नाभि स्थल है महाकाल की यह नगरी

उज्जैन यानी उज्जयिनी यानी आदि काल से देश की सांस्कृतिक राजधानी। महाकाल की यह नगरी भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली रही है। मध्य प्रदेश के बीचोंबीच स्थित धार्मिक और पौराणिक रूप से दुनिया भर में प्रसिद्ध उज्जैन को मंदिरों का शहर भी कहते हैं।

जल मंदिर पावापुरी: भगवान महावीर का निर्वाण स्थल, जहां उन्होंने दिया था पहला और अंतिम उपदेश

जल मंदिर पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। भगवान महावीर को इसी स्थल पर मोक्ष यानी निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। जैन धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र शहर है। बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास पावापुरी में यह जल मंदिर है। यह वही जगह है जहां भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला और आखिरी उपदेश दिया था। भगवान महावीर ने इसी जगह से विश्व को अहिंसा के साथ जिओ और जीने दो का संदेश दिया था।