Skip to main content

नालंदा विश्वविद्यालय: दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय में बख्तियार खिलजी ने लगा दी थी आग

शिक्षा के क्षेत्र में अभी बिहार की स्थिति भले ही दयनीय हो, लेकिन एक समय बिहार के बल पर भारत विश्व गुरु कहलाता था। विक्रमशिला के साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन काल में शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था। नालंदा विश्वविद्यालय को दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है। यह विश्व का प्रथम पूरी तरह से आवासीय विश्वविद्यालय था। यहां भारत ही नहीं दुनिया भर से छात्र अध्ययन करने के लिए आते थे।


अपनी शिक्षा के लिए विश्व विख्यात नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के छात्र अध्ययन करते थे। यहां चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत , इंडोनेशिया, फारस और तुर्की के छात्र भी शिक्षा ग्रहण के लिए आते थे। लेकिन यहां प्रवेश के लिए उन्हें कड़ी परीक्षा देनी होती थी। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय में 6 द्वार थे और हर द्वार पर एक द्वार पंडित होते थे। नामांकन से पहले द्वार पंडित छात्रों की परीक्षा लेते थे। उनकी परीक्षा में सफल छात्रों को ही अंदर जाने की अनुमति होती थी। चीनी भ्रमणकारी ह्वेनसांग और इत्सिंग ने नालंदा में ही शिक्षा ग्रहण की थी।
उच्च शिक्षा के सबसे प्रमुख केंद्र नालंदा में 10 हजार विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए करीब दो हजार अध्यापक थे। यहां साहित्य, ज्योतिष विज्ञान, मनोविज्ञान, कानून, खगोल विज्ञान समेत इतिहास, गणित, भाषा विज्ञान, अर्थशास्त्र और चिकित्सा शास्त्र जैसे कई विषयों की पढ़ाई होती थी। बताया जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय या महाविहार एक बड़ा बौद्ध मठ था। ये भी बताया जाता है कि भगवान बुद्ध यहां कई बार आए थे। इस कारण यह पांचवी से बारहवीं शताब्दी में बौद्ध शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा। अब यहां सिर्फ खंडहर बचा है। इस विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को देखकर आप इसके प्राचीन वैभव का अंदाजा लगा सकते हैं।
इस विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना गुप्त शासक कुमारगुप्‍त पांचवी शताब्दी के 450 ईसवीं में की थी। गुप्तवंश के बाद भी सभी शासकों ने इसकी समृद्धि में अपना योगदान जारी रखा। सम्राठ अशोक तथा हर्षवर्धन ने यहां सबसे ज्यादा मठों, विहार तथा मंदिरों का निर्माण करवाया था। बताया जाता है कि भगवान बुद्ध ने सम्राट अशोक को यहीं उपदेश दिया था।
नालंदा विश्वविद्यालय को नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक दुनियाभर में खूब प्रसिद्धी मिली, लेकिन मुस्लिम आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने 1199 ईस्वी के आसपास यहां हमला कर इसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। विक्रमशिला की तरह इसके पुस्तकालय को भी आग लगा दी गई। बताया जाता है कि पुस्तकालय में इतनी किताबें और पांजुलिपियां थीं कि तीन महीने से ज्यादा तक आग दहकती रही।
कहा जाता है कि इस विश्वविद्यालय को नष्ट करने के क्रम में बख्तियार खिलजी ने एक हजार से ज्यादा बौद्ध भिक्षुओं को जिंदा जला दियाऔर करीब इतने ही भिक्षुओं के सिर कलम कर दिए। भारतीय ज्ञान भंडार को नष्ट करने के साथ ही भारतीय सभ्यता-संस्कृति को नष्ट करने में मुस्लिम आक्रमणकारियों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। अब खुदाई में करीब 14 हेक्टेयर में इस विश्वविद्यालय के अवशेष मिले हैं। यहां सिर्फ छात्रों के लिए 300 से अधिक कक्ष बने हुए थे।

नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया हुआ है। यह हर साल लाखों लोग नालंदा विश्वविद्यालय के साथ म्यूजियम, नव नालंदा महाविहार और ह्वेनसांग मेमोरियल हाल देखने आते हैं। नालंदा विश्वविद्यालय स्थल बिहार की राजधानी पटना से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर है। राजगीर सिर्फ 12 किलोमीटर दूर है। आप यहां से राजगीर के साथ पावापुरी, गया और बोधगया के साथ बिहारशरीफ और बड़ागांव स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर भी जा सकते हैं।

सभी फोटो- बिहार टूरिज्म
कैसे पहुंचें
नालंदा विश्वविद्यालय रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। हालांकि नालंदा में रेलवे स्टेशन है, लेकिन ये काफी छोटा है। पास में राजगीर एक प्रमुख बड़ा रेलवे स्टेशन है। नजदीकी हवाई अड्डा पटना ही है जो करीब 90 किलोमीटर दूर है।

 फोटो- अतुल्य भारत

कब पहुंचे

बिहार में काफी सर्दी और गर्मी पड़ती है। यहां आने के लिए सबसे अच्छा समय फरवरी से मार्च और सितंबर से नवंबर के बीच का होता है।

ब्लॉग पर आने और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आप इस पोस्ट पर अपना विचार, सुझाव या Comment शेयर करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा। 

-हितेन्द्र गुप्ता

Comments

Popular posts from this blog

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

Rajnagar, Madhubani: खंडहर में तब्दील होता राजनगर का राज कैंपस

राजनगर का ऐतिहासिक राज कैंपस खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह राज कैंपस राज्य सरकार की अनदेखी के कारण उपेक्षित पड़ा हुआ है। यह कैंपस इंक्रीडेबल इंडिया का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के महल और मंदिर स्थापत्य कला के अद्भूत मिसाल पेश करते हैं। दीवारों पर की गई नक्काशी, कलाकारी और कलाकृति देखकर आप दंग रह जाएंगे।

Contact Us

Work With Me FAM Trips, Blogger Meets, Product Launch Events, Product Review या किसी भी तरह के collaboration के लिए guptahitendra [at] gmail.com पर संपर्क करें। Contact me at:- Email – guptagitendra [@] gmail.com Twitter – @GuptaHitendra Instagram – @GuptaHitendra Facebook – GuptaHitendra

अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली: जहां जाने पर आपको मिलेगा स्वर्गिक आनंद

दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित स्वामीनारायण मंदिर अपनी वास्तुकला और भव्यता के लिए दुनियाभर में मशहूर है। करीब 100 एकड़ में फैला यह अक्षरधाम मंदिर दुनिया के सबसे बड़े मंदिर परिसर के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल है। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। इस मंदिर को बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) की ओर से बनाया गया है। इसे आम भक्तों- श्रद्धालुओं के लिए 6 नवंबर, 2005 को खोला गया था।

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां प्रतिदिन शयन करने आते हैं भोलेनाथ महादेव

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में चौथा है। मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर- ममलेश्वर महादेव के रूप में। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इंदौर से 77 किलोमीटर पर है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले नर्मदा नदी में स्नान कर ऊं के आकार में बने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

हिंद-इस्लामी वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण शेरशाह सूरी का मकबरा

शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार रोहतास जिले के सासाराम में है। शेरशाह का यह मकबरा एक विशाल सरोवर के बीचोंबीच लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। शेरशाह ने अपने जीवनकाल में ही इस मकबरे का निर्माण शुरू कर दिया था, लेकिन पूरा उसके मृत्यु के तीन महीने बाद ही हो पाया। शेरशाह की मौत 13 मई, 1545 को कालिंजर किले में हो गई थी और मकबरे का निर्माण 16 अगस्त, 1545 को पूरा हुआ। शेरशाह के शव को कालिंजर से लाकर यहीं दफनाया गया था। इस मकबरे में 24 कब्रें हैं और शेरशाह सूरी की कब्र ठीक बीच में है।

About Us

Hitendra Gupta ट्रेवल ब्लॉगर, मीडिया प्रोफेशनल, डिजिटल इन्फ्लुएंसर और प्रकृति प्रेमी शाकाहारी मैथिल

उज्जैन- पृथ्वी का नाभि स्थल है महाकाल की यह नगरी

उज्जैन यानी उज्जयिनी यानी आदि काल से देश की सांस्कृतिक राजधानी। महाकाल की यह नगरी भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली रही है। मध्य प्रदेश के बीचोंबीच स्थित धार्मिक और पौराणिक रूप से दुनिया भर में प्रसिद्ध उज्जैन को मंदिरों का शहर भी कहते हैं।

जल मंदिर पावापुरी: भगवान महावीर का निर्वाण स्थल, जहां उन्होंने दिया था पहला और अंतिम उपदेश

जल मंदिर पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। भगवान महावीर को इसी स्थल पर मोक्ष यानी निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। जैन धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र शहर है। बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास पावापुरी में यह जल मंदिर है। यह वही जगह है जहां भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला और आखिरी उपदेश दिया था। भगवान महावीर ने इसी जगह से विश्व को अहिंसा के साथ जिओ और जीने दो का संदेश दिया था।