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यूपी-बिहार से हनीमून पर नहीं जा सकते दूर? तो पास में ही हैं बजट के अंदर के ये रोमांटिक जगहें

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आमतौर पर रोमांटिक और हनीमून डेस्टिनेशन को लेकर लोगों के जेहन में हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और केरल के नाम ही सामने आते हैं। लेकिन कोरोना के कारण या फिर बजट को लेकर हम कई बार इन जगहों पर नहीं जा पाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमारे घर के आसपास यूपी-बिहार में ऐसा कुछ नहीं है जहां हनीमून मनाने या रोमांटिक डेट पर जा सके?

श्रावण महीने में कांवड़ों की धूम देखनी है तो यहां जाएं

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इस साल 25 जुलाई से सावन शुरू हो रहा है। सावन यानी श्रावण का महीना हिंदू धर्म के लोगों के लिए काफी खास है। श्रावण के महीने में करोड़ों हिंदू श्रद्धालु कांवड़ लेकर बाबा के धाम जाते हैं। इस महीने कांवड़ों की धूम रहती है। कुंभ के तरह ही उनकी कांवड़ यात्रा के लिए सरकार की ओर से काफी इंतजाम किए जाते हैं। सरकार की ओर से पूरा ख्याल रखा जाता है कि गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़ियों को कोई परेशानी ना हो।

बजट में कैसे करें देश के सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक हिमाचल के चंबा का सफर

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चंपावती...चंपा...और अब चंबा. हिमाचल प्रदेश में रावी नदी के किनारे 996 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की घाटी में बसा यह इलाका एक स्वर्ग ही है। जम्मू-कश्मीर से सटे हिमाचल के इस इलाके में प्रकृति ने जमकर खूबसूरती बिखेरी है। मंदिरों से भरा यह क्षेत्र झीलों, सुंदर झरनों, बर्फ से ढके पर्वत और हरे-भरे जंगलों के कारण किसी जन्नत से कम नहीं है।

40 के बाद सफर के 15 फायदे जो कम उम्र के लोग ना जानते ना समझते हैं

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आमतौर पर हर व्यक्ति जीवन के शुरूआती दिनों में पढ़ाई-लिखाई के बाद नौकरी में बिजी हो जाता है। आप भी 40 साल की उम्र तक जॉब और पारिवारिक दायित्वों को पूरा करने में लगे रहते हैं। हर चीज में बचत के बारे में सोचते रहते हैं। नौकरी, परिवार फिर बच्चों के लिए अपनी शौक और इच्छाओं को मार देते हैं। लेकिन 40 के बाद आपका जीवन आपका अपना जीवन होता है। चालीस के बाद आपको पता चल जाता है कि आपकी जिंदगी में किन चीजों की अहमियत है और किन गैरजरूरी चीजों को जिंदगी से निकाल देना है। उन चीजों पर समय की बर्बादी क्यों,  जो आपको कुछ नहीं देतीं। ऐसे में आप कई चिंताओं से मुक्त होकर निकल पड़ते हैं दुनिया घूमने और जानने-समझने...

मन को असीम शांति प्रदान करता है नालंदा, राजगीर स्थित विश्व शांति स्तूप

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बिहार में नालंदा जिले के राजगीर में है विश्व शांति स्तूप। राजगीर में वैसे तो कई पर्यटक और तीर्थ स्थल है, लेकिन यहां का प्रमुख आकर्षण है यह विश्व शांति स्तूप। यह स्तूप 400 मीटर ऊंची रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित है। संगमरमर के पत्थरों से बने इस विश्व शांति स्तूप में भगवान बुद्ध की चार स्वर्ण प्रतिमाएं है। ये चार स्वर्ण प्रतिमाएं जीवन के चार चरणों जन्म, ज्ञान, उपदेश और मृत्यु को दर्शाती है।

World Peace Pagoda, Vaishali: विश्व को शांति का संदेश देता वैशाली का विश्व शांति स्तूप

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वैशाली का विश्व शांति स्तूप आज भी विश्व को शांति का संदेश दे रहा है। लोकतंत्र की जननी वैशाली ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना है। यहां जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर की जन्मस्थली बासोकुंड यानी कुंडलपुर है। अशोक का लाट यानी अशोक स्तंभ, दुनिया का सबसे प्राचीन संसद भवन राजा विशाल का गढ़, बौद्ध स्तूप, अभिषेक पुष्करणी, बावन पोखर और सबसे प्रमुख जापान की ओर बनवाया गया विश्व शांति स्तूप है।

बिहार के वैशाली में है दुनिया की सबसे पुरानी संसद: राजा विशाल का गढ़

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आज जो हम हर बात में प्रजातंत्र और लोकतंत्र की बात करते हैं उसे सबसे पहले दुनिया को बिहार ने दिया था। बिहार के वैशाली को दुनिया में पहला गणराज्य माना जाता है।  वैशाली का लिच्छवी गणराज्य विश्व का प्रथम गणतंत्र माना जाता है। यह आठ छोटे-छोटे राज्यों का संघ था और यहां सारे बड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते थे।  ईसा पूर्व 6-7 सौ साल पहले वैशाली लिच्छवी गणराज्य की राजधानी थी।

अशोक स्तंभ वैशाली: जानिए जैन धर्म का यह जन्मस्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए क्यों है खास

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वैशाली यानी दुनिया का पहला गणराज्य। वैशाली यानी जिसने विश्व को लोकतंत्र दिया। महाभारत युग के राजा विशाल के नाम पर बना यह वैशाली भगवान महावीर की जन्मभूमि भी है। यानी जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर का जन्म बासोकुंड, वैशाली में ही हुआ था। लेकिन यह सिर्फ जैन धर्म के लिए ही पवित्र स्थल नहीं है, बल्कि वैशाली एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल भी है। यहां हर साल चीन, जापान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, कनाडा के साथ दुनिया भर से लाखों पर्यटक आते हैं।

माता मुंडेश्वरी मंदिर: दुनिया का सबसे प्राचीन मंदिर, जहां बलि के बाद भी जिंदा रहते हैं बकरे

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भारत में पूजा-अर्चना के लिए एक से बढ़कर एक मंदिर हैं। लेकिन मान्यता है कि देश में माता का सबसे प्राचीन मंदिर बिहार के कैमूर जिले में है। माता का यह मंदिर है- मुंडेश्वरी मंदिर। यह मंदिर शिव और शक्ति को समर्पित है। यह मंदिर देश-दुनिया में अपनी महिमा और मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के पूर्व में माता मुंडेश्वरी की एक दिव्य और भव्य प्रतिमा है। माता की पत्थर की मूर्ति वाराही रूप में है। माता के इस रूप का वाहन महिष है।

केसरिया में है दुनिया का सबसे बड़ा स्‍तूप, भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण से पहले किया था रात्रि विश्राम

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सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लिए बिहार सबसे पवित्र स्थल है। बिहार में बौद्ध धर्म के कई पवित्र स्थलों में से एक है केसरिया का बौद्ध स्तूप। बताया जाता है कि भगवान बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व में कुशीनगर में महापरिनिर्वाण लेने से पहले एक रात केसरिया में बिताई थी। बताया जाता है कि वैशाली से कुशीनगर जाते वक्त केसरिया में विश्राम के दौरान उन्होंने अपना भिक्षा पात्र लिच्छविओं को सौंप दिया था।

कुशीनगर: यहां भगवान बुद्ध ने प्राप्त किया था महापरिनिर्वाण

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उत्तर प्रदेश में कुशीनगर बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह भगवान बुद्ध के चार पवित्र स्थानों में से एक है। बताया जाता है कि भगवान बुद्ध ने 483 ईसा पूर्व में कुशीनगर में ही आखिरी सांस ली थी यानी महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया था। यहां रामाभार स्तूप में उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

देवघर बाबाधाम में लगता है दुनिया का सबसे लंबा धार्मिक मेला

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इस बार 25 जुलाई रविवार से सावन का पावन महीना शुरू हो रहा है, जो 22 अगस्त रविवार तक रहेगा। सावन का नाम आते ही दिमाग में बाबा भोलेनाथ के कांवड यात्रा की बात घूमने लगती है। हर साल सावन के महीने में लोग कांवड़ लेकर बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने बाबाधाम जाते हैं। करीब एक महीने के दौरान (इस बार सिर्फ 29 दिन) हर दिन लाखों लोग भोले बाबा को गंगा जल अर्पण करते हैं। वैसे तो यहां सालों भर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सावन के महीने का विशेष महत्व है।

नालंदा विश्वविद्यालय: दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय में बख्तियार खिलजी ने लगा दी थी आग

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शिक्षा के क्षेत्र में अभी बिहार की स्थिति भले ही दयनीय हो, लेकिन एक समय बिहार के बल पर भारत विश्व गुरु कहलाता था। विक्रमशिला के साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन काल में शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था। नालंदा विश्वविद्यालय को दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है। यह विश्व का प्रथम पूरी तरह से आवासीय विश्वविद्यालय था। यहां भारत ही नहीं दुनिया भर से छात्र अध्ययन करने के लिए आते थे।

जल मंदिर पावापुरी: भगवान महावीर का निर्वाण स्थल, जहां उन्होंने दिया था पहला और अंतिम उपदेश

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जल मंदिर पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। भगवान महावीर को इसी स्थल पर मोक्ष यानी निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। जैन धर्म के लोगों के लिए यह एक पवित्र शहर है। बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास पावापुरी में यह जल मंदिर है। यह वही जगह है जहां भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला और आखिरी उपदेश दिया था। भगवान महावीर ने इसी जगह से विश्व को अहिंसा के साथ जिओ और जीने दो का संदेश दिया था।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय: दुनिया के इस प्रतिष्ठित शिक्षा के केंद्र को मुस्लिम आक्रंता बख्तियार खिलजी ने कर दिया था नष्ट

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प्राचीन काल में बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय दुनिया के दो प्रतिष्ठित शिक्षा के केंद्र थे। नालंदा विश्वविद्यालय की तरह ही विक्रमशिला विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दुनिया भर से विद्यार्थी आते रहते थे। इसका निर्माण 8 वीं शताब्दी में पाल वंश के शासक धर्मपाल ने करवाया था। धर्मपाल के बाद इसके नष्ट होने से पहले तक तेरहवीं शताब्दी तक उनके उत्तराधिकारियों ने इसका संरक्षण किया। बताया जाता है कि 1202-1203 ईस्वी में मुस्लिम आक्रंता बख्तियार खिलजी ने इसे नष्ट कर दिया।

लोगों के लिए खुला स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, यहां पहुंचते हैं सबसे ज्यादा पर्यटक

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गुजरात के केवड़िया स्थित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। कोरोना संकट काल में महामारी और कम पर्यटक आने के लिए इसे बंद कर दिया गया था। अब कोरोना की स्थिति में सुधार होने के बाद इसे फिर से खोल दिया गया है। पहले दिन यहां 300 पर्यटक पहुंचे। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करना जरूरी होगा। लोगों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।

गोल्डन चैरियट ट्रेन: आप भी ले सकते हैं शाही यात्रा का आनंद

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गोल्डन चैरियट यानी स्वर्ण रथ... यह ट्रेन नाम के अनुरूप ही आपको एक सुनहरे सपनों की दुनिया में ले जाता है। यह आपको राजसी अंदाज में दक्षिण भारत के गौरवशाली इतिहास के दौर में ले जाता है। यह दक्षिण भारत की वास्तुकला, संस्कृति और इतिहास से रूबरू कराता है। भारतीय रेलवे का यह ट्रेन गोल्डन चैरियट न सिर्फ आपको दक्षिण भारत के खूबसूरत ऐतिहासिक और विरासत स्थलों की यात्रा पर ले जाता है, बल्कि खुद पर गर्व करने का मौका भी देता है।

बुद्ध स्मृति पार्क: पटना का सबसे लोकप्रिय उद्यान, जहां रोज आते हैं हजारों पर्यटक

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बुद्ध स्मृति पार्क काफी जल्दी ही पटना का सबसे लोकप्रिय पर्यटक स्थल बन गया है। पटना के लोगों के साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पटना जंक्शन के पास होने के कारण पटना आने वाले तकरीबन सभी लोग यहां जरूर आते हैं। पटना का यह पार्क अब दुनियाभर के बौद्ध पर्यटकों के लिए आस्था का केंद्र बन गया है।

श्री हरिमंदिर जी साहिब: सिख धर्म का दूसरा प्रमुख तख्त है पटना साहिब

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बिहार की राजधानी पटना में स्थित है सिख धर्म का दूसरा सबसे प्रमुख तख्त श्री हरिमंदिर जी साहिब। यह सिखों के दसवें और आखिरी गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है। गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसम्बर 1666 को पटना में सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी और माता गुजरी के घर हुआ था। उनके बचपन का नाम गोबिन्द राय था। जिस घर में उनका जन्म हुआ था, आज वहीं तख्त श्री हरिमंदिर जी साहिब है।

अहिल्या स्थान: जहां प्रभु राम के किया था देवी अहिल्या का उद्धार

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मिथिला में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है अहिल्या स्थान। हालांकि सरकारी उदासीनता के कारण यह वर्षों से उपेक्षित रहा है। यहां देवी अहिल्या को समर्पित एक मंदिर है। रामायण में गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या का जिक्र है। देवी अहिल्या गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई थीं। जिनका भगवान राम ने उद्धार किया था। देश में शायद यह एकमात्र मंदिर है जहां महिला पुजारी पूजा-अर्चना कराती हैं।

बोधगया महाबोधि मंदिर- यहां हुई थी गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति

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बोधगया- जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। जिस स्थान पर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई वहां एक विशाल खूबसूरत प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर को महाबोधि मंदिर या महाबोधि विहार कहा जाता है। बौद्ध धर्म के श्रद्धालुओं के लिए यह सबसे पवित्र स्थल है। यह भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र स्थलों में से एक है। महाबोधि मंदिर परिसर में प्रार्थना, धार्मिक अनुष्ठान और ध्यान लगाने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं।

गया विष्णुपद मंदिर: जानिए क्या है खास मान्यता और इसका पितरों से क्या है संबंध

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करीब 30 साल पहले जब गया गया था, तो इस शहर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उस समय घूम-फिर कर घर आ गया। गया से ज्यादा समय यहां के करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोधगया घूमने में गुजरा था। तीन दिन यहां रहने के दौरान जब गया के बारे में और जानकारी मिली, तब पता चला कि क्यों हिंदू धर्म में इस शहर की इतनी मान्यता है।

प्रयागराज: ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद यहीं किया था प्रथम यज्ञ

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गंगा, यमुना और सरस्वती तीन नदियों के संगम पर स्थित है प्रयागराज। संगम स्थल को त्रिवेणी कहा जाता है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र और लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ यहीं किया था। इसी 'प्रथम यज्ञ' के प्र और यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना है। देश के ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरों में से एक प्रयागराज में हर बारह वर्ष में कुंभ मेला और हर छह साल में अर्द्धकुंभ लगता है।

दिल्ली के 7 सबसे लोकप्रिय मंदिर, जहां श्रद्धालुओं की ही नहीं पर्यटकों की भी लगी रहती है भीड़

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दिल्ली देश की राजधानी है। यहां दुनिया के तमाम देशों के दूतावास और उच्चायोग हैं। यहां कई पर्यटक स्थल हैं। लाल किला, कुतुब मीनार, जंतर-मंतर, इंडिया गेट जैसे दर्शनीय स्थल हैं। दिल्ली में मुगल गार्डन, लोधी गार्डन और गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज जैसे कई उद्यान हैं। यहां दुनिया भर से पर्यटक घूमने आते हैं।

लाल किला: आखिर इस महल के बारे में आप क्या और कितना जानते हैं?

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लाल किला दुनिया के सबसे प्रभावशाली महलों में से एक है। सभी देशवासी जानते हैं कि देश के प्रधानमंत्री हर साल यहां 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। लाल किले के प्राचीर से हर 15 अगस्त को होने वाले इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को हम सब देखते हैं। लेकिन लालकिले के बारे में आप इससे ज्यादा क्या जानते हैं।

सफदरजंग मकबरा: दिल्ली की इस ऐतिहासिक इमारत में जाते हैं खास लोग

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सफदरजंग मकबरा दिल्ली की एक ऐतिहासिक इमारत है। यह मकबरा सफदरजंग एयरपोर्ट के पास अरविंदो मार्ग पर है। संगमरमर और बलुआ पत्थर से बना यह मकबरा वास्तुशिल्प का बेहतरीन उदाहरण है। यह मकबरा सफदरजंग यानी मुकीम अबुल मंसूर खान की याद में उसके बेटे अवध के नवाब शुजाउद्दौला खां ने बनाया था। शुजाउद्दौला ने इस वर्ष 1753-54 में बनवाया था। मुकीम अबुल मंसूर खान अंतिम मुगल बादशाह मुहम्मद शाह के अधीन अवध के वाइसराय थे जो बाद में उनके प्रधानमंत्री बने। मुहम्माद शाह ने उन्हें सफदरजंग की उपाधि प्रदान की थी।

कौन सा पर्यटक स्थल हैं विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा जगह और किस राज्य में आते हैं सबसे ज्यादा पर्यटक?

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करीब साल भर से कोरोना महामारी के कारण देश में लोगों का कहीं आना-जाना बंद है। विदेशी पर्यटक भी घूमने नहीं आ रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि देश में हर साल आने वाले लाखों पर्यटकों का पसंदीदा पर्यटक स्थल कौन सा है? और किस राज्य में सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं? सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक किस देश से आते हैं?

राजघाट- जानिए बापू से जुड़े इस स्थल के बारे में सब कुछ

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राजघाट राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का समाधि स्थल है। यहां 31 जनवरी ,1948 को उनका अंतिम संस्कार किया गया था। अंतिस संस्कार के बाद काफी दिनों तक यह स्थल यूं ही पड़ा रहा। बाद में वानू जी भूपा ने इसका डिजाइन तैयार कर एक वर्गाकार जगह में यह समाधि बनाई। यहां काले रंग के संगमरमर से बने एक मंच या चबूतरे पर बापू के बोले अंतिम शब्द 'हे राम' भी अंकित है।

इंडिया की पहचान है इंडिया गेट, जानिए इसके बारे में सब कुछ

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दिल्ली में दिल में स्थित सबसे फेमस जगह है इंडिया गेट। इंडिया गेट दिल्ली की पहचान है। यह सैनिकों की याद में बनाया गया स्मारक है, लेकिन दिल्ली का यह सबसे खास पिकनिक स्पॉट है। रोज शाम में यहां की रौनक अलग ही रहती है। यहां शाम में लोग परिवार या दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने आते हैं। बोट क्लब के अलावा यहां बच्चों के लिए एक चिल्ड्रेन पार्क भी है। शाम के बाद यहां काफी चहल पहल रहती है।

राष्ट्रीय समर स्मारक: जानें आजादी के बाद शहीद सैनिकों के लिए बना यह मेमोरियल क्यों है खास

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राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial)  दिल्ली में इंडिया गेट के पास सुरक्षा बलों को सम्मानित करने के लिए बनाया गया एक स्मारक है। इसे आजादी के बाद से देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिकों के सम्मान में बनाया गया है। करीब 44 एकड़ में बने इस नेशनल वॉर मेमोरियल में 1947-48 ( पाकिस्तान), 1961 (गोवा), 1962 ( भारत-चीन युद्ध), 1965, 1971, 1987 (पाकिस्तान), 1987-88 (श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के ऑपरेशन), 1999 ( कारगिल, भारत-पाकिस्तान) और अन्य युद्धों में शहीद हुए 25,942 सैनिकों के नाम पत्थर पर लिखे गए हैं।

संसद भवन- आप भी जा सकते हैं यहां घूमने

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देश के लोकतंत्र का मंदिर है देश का संसद भवन। यह दुनियाभर में सबसे आकर्षक संसद भवन है। इस भवन में देश की संसदीय कार्यवाही होती है। देश भर के लोकसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि यहीं पर चर्चा करते हैं और कानून बनाने का काम करते हैं। संसद सत्र के समय लोकसभा और राज्यसभा दोनों सनद के सदस्य कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं।

बेहद भव्य और शानदार है दिल्ली-एनसीआर का पहला इस्कॉन मंदिर

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दिल्ली-एनसीआर में बना पहला इस्कॉन मंदिर ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में है। इसे श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर के नाम से भी जानते हैं। यह खूबसूरत लोटस टैंपल और कालकाजी मंदिर के पास है। इस मंदिर की वास्तुकला शानदार है। इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। यहां आकर घंटों बैठकर राधा-कृष्णा की मूर्ति को निहारते रहने का मन करता है।

झंडेवाला मंदिर: जानिए कैसे पड़ा इस मंदिर का नाम और क्या है इसका ऐतिहासिक महत्व

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दिल्ली में करोलबाग के पास एक प्राचीन मंदिर है झंडेवाला मंदिर। यह मंदिर दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस से भी सिर्फ तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झंडेवाला मंदिर जहां है वह इलाका झंडेवाला के नाम से ही मशहूर हो गया है। यह सिर्फ दिल्ली ही नहीं देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है। झंडेवाला मंदिर झंडेवाली देवी को समर्पित एक सिद्धपीठ है। इस मंदिर का धाार्मिक ही नही ऐतिहासिक महत्व भी है।

कालकाजी मंदिर: यहां प्रकट हुई थीं मां महाकाली

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दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास माता कालका को समर्पित श्री कालकाजी मंदिर है। श्री कालकाजी मंदिर के कारण यह इलाका कालकाजी के नाम से दुनिया भर में फेमस है। यह मंदिर दिल्ली के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। माता कालका मां काली देवी की अवतार हैं। श्री कालकाजी मंदिर को जयंती पीठ या मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहते हैं। मान्यता  है कि यहां भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

आद्या कात्यायिनी छतरपुर मंदिर, दिल्ली

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दिल्ली के छतरपुर इलाके में स्थित है आद्या कात्यायिनी मंदिर। छतरपुर इलाके में होने का कारण लोग इसे छतरपुर मंदिर भी कहते हैं। देवी दुर्गा के छठे स्‍वरूप माता कात्यायनी को समर्पित यह मंदिर देश का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। करीब 70 एकड़ में फैला यह मंदिर बेहद खूबसूरत है। संगमरमर निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला, नक्‍काशी अपने आप में बेजोड़ है। बताया जाता है कि इसमें वास्तुकला की द्रविड़ और नागर शैलियों का प्रयोग हुआ है।

गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब दिल्ली- सुकून की तलाश में यहां आते हैं लोग

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दिल्ली के दिल में कनॉट प्लेस के पास स्थित गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब सिक्खों का एक प्रमुख गुरुद्वारा है। यह कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़गसिंह मार्ग पर प्राचीन हनुमान मंदिर के पास स्थित है। यह सिक्खों के आठवें गुरु श्री हर किशन सिंह जी की याद में बनाया गया है। इसे सिक्ख जनरल बघेल सिंह ने साल 1783 में बनाया था।

दुनिया के सबसे खूबसूरत मंदिरों में से एक है दिल्ली का लोटस टेंपल, यहां पूजा नहीं प्रार्थना होती है

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दिल्ली में कालकाजी मंदिर, नेहरू प्लेस के पास है लोटस टेंपल। कमल की तरह बने होने के कारण दुनिया भर के लोग इसे लोटस टेंपल के नाम से जानते हैं। बहाई धर्म के लोगों के इस उपासना स्थल को बहाई उपासना मंदिर भी कहते हैं। हालांकि यह बहाई धर्म के लोगों का उपासना स्थल है, लेकिन यहां सभी धर्म के लोग प्रार्थना करते हैं। यहां सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों के लेख का पाठ किया जाता है। इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और यहां कोई पूजा-पाठ भी नहीं की जाती है। लोग यहां आकर शांति से ध्यान लगाकर प्रार्थना करते हैं।

अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली: जहां जाने पर आपको मिलेगा स्वर्गिक आनंद

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दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित स्वामीनारायण मंदिर अपनी वास्तुकला और भव्यता के लिए दुनियाभर में मशहूर है। करीब 100 एकड़ में फैला यह अक्षरधाम मंदिर दुनिया के सबसे बड़े मंदिर परिसर के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल है। यहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। इस मंदिर को बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) की ओर से बनाया गया है। इसे आम भक्तों- श्रद्धालुओं के लिए 6 नवंबर, 2005 को खोला गया था।

अक्षरधाम मंदिर सहज आनंद वाटर शो- तैयार हो जाइए एक अलग दुनिया में जाने के लिए...

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कोरोना महामारी के कारण आजकल दिल्ली स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद है। लेकिन जब खुला रहता है तो मंदिर प्रागंण में बने यज्ञपुरुष कुंड में हर शाम सहज आनंद वाटर शो का आयोजन किया जाता है। सिर्फ 24 मिनट के सहज आनंद वाटर शो में आपके सामने मल्टी-कलर लेजर शो, वीडियो प्रोजेक्शन्स, वाटर जेट, पानी की लहरों और रोशनी के साथ सिम्फनी सराउंड साउंड से एक ऐसा सुंदर कार्यक्रम पेश किया जाता है कि आप खुद को एक अलग ही दुनिया में पाते हैं। इस सहज आनंद वाटर शो के दौरान आप सब कुछ भूलकर, सुध-बुध खोकर एकटक शो को देखने में लगे रहते हैं। आपको इस दौरान खुद के होने का भी एहसास नहीं होता। आप खुद में वापस लौटते हैं शो के खत्म होने के बाद ही। इस शो में केना उपनिषद से लिए गए कहानी के जरिए आपको सहज आनंद से परिचय कराया जाता है। जीवन में सहज आनंद के लिए आपका ये शो देखना जरूर बनता है। अब जब भी कभी दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर आइए शाम में इस शो का आनंद जरूर लीजिए। तब तक शो के कुछ बेहतरीन तस्वीरों को देखिए-  सभी फोटो सौजन्य- Swaminarayan Akshardham Mandir मंदिर परिसर के अंदर कैमरा, मोबाइल के साथ किसी...

अहमदाबाद: इस शहर ने पहली बार में ही दिल जीत लिया

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अहमदाबाद... पहली बार वर्डप्रेस के वर्डकैंप आयोजन के कारण यहां जाने का मौका मिला। यहां के लोगों ने जिस तरह मेजबानी की, वह हमेशा याद रखेने लायक है। सिर्फ तीन में अहमदाबाद के लोगों ने मेरा दिल जीत लिया। यहां एक बार आने के बाद यह जरूर है कि आप इस शहर में बार-बार आना चाहेंगे।

Zirakpur: चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के बीच तेजी से उभरता एक सुंदर शहर

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केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, हरियाणा के पंचकूला और पंजाब के मोहाली के बीच एक सुंदर शहर तेजी से लोगों के मन में जगह बना रहा है। यह शहर है जिरकपुर। चंडीगढ़ से सिर्फ दस किलोमीटर दूरी पर स्थित यह शहर धीरे-धीरे काफी लोकप्रिय होता जा रहा है। वीकेंड पर यह आसपास के पर्यटकों के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है।

यमुनोत्री: जहां स्नान और दर्शन से यम भी होते हैं खुश

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यमुनोत्री यानी यमुना नदी का उद्गम स्थल। गंगा के बाद देश की दूसरी सबसे पवित्र और पूज्य नदी यमुना उत्तराखंड का एक प्रमुख पर्यटक और तीर्थ स्थल है। समुद्र तट से करीब 3293 यमुनोत्री पहाड़ के चार धाम में से एक है। हिमालय की चारधाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से ही होती है। इस साल 2021 में भी सबसे पहले 14 मई को यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे फिर 15 मई को गंगोत्री धाम मंदिर के कपाट खुलेंगे। केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई को और बद्रीनाथ के कपाट 18 मई को खोले जाएंगे।

Xtra Cover: यात्रा के दौरान इन बातों का जरूर रखें ध्यान

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अगर आप कहीं घूमने जा रहे हैं और चाहते हैं कि आपकी यात्रा सुखद हो तो घर से निकलने से पहले कुछ खास बातों पर ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

Weekend-Getaways: दिल्ली के पास घूमने लायक 10 बेहतरीन जगह

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दिल्ली के आस-पास घूमने लायक कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं जहां आप वीकेंड पर जा सकते हैं। आप आज की भागदौड़ वाली जिंदगी के बीच सटरडे-संडे को इन जगहों पर जाकर सुकून से समय बिता सकते हैं। दिल्ली से इन जगहों पर जाने में कोई दिक्कत भी नहीं है। यहां आप अपनी गाड़ी या सार्वजनिक परिवहन से भी जा सकते हैं।

वाराणसी यानी बनारस यानी दुनिया का सबसे प्राचीन और जीवंत शहर

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वरुना और असि नदी के संगम पर बसा शहर वाराणसी... यानी बनारस... यानी वह शहर जहां जीवन में हर वक्त रस बना रहता है। जीवन मस्त रहता है। गंगा किनारे स्थित बाबा भोलेनाथ ही यह नगरी दुनिया भर में काशी नाम से भी विख्यात है। लोग यहां पवित्र गंगा में डुबकी लगाने आते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां डुबकी लगाने से सारे पाप और कष्ट नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही यहां मृत्यु प्राप्त होने और अंतिम संस्कार होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।  

उज्जैन- पृथ्वी का नाभि स्थल है महाकाल की यह नगरी

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उज्जैन यानी उज्जयिनी यानी आदि काल से देश की सांस्कृतिक राजधानी। महाकाल की यह नगरी भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली रही है। मध्य प्रदेश के बीचोंबीच स्थित धार्मिक और पौराणिक रूप से दुनिया भर में प्रसिद्ध उज्जैन को मंदिरों का शहर भी कहते हैं।

ताजमहल: प्रेम और सौंदर्य के प्रतीक इस अजूबे को जीवन में एक बार जरूर देखना चाहिए

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ताजमहल का नाम आते ही जेहन में वह अनुपम तस्वीर उभरती है जो सात आश्चर्यों में से एक है। उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित ताज महल अपने में एक अलग ही भव्यता को समाए हुए है। दुनिया में अप्रतिम वास्तुकला का उदाहरण यह ताज महल प्रेम और सौंदर्य का एक चमकता सितारा है। दुनिया को कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो यहां आकर इसके आकर्षण में खो नहीं गया हो।

सारनाथ: काशी में मोक्ष प्राप्ति से पहले एक बार जरूर जाना चाहिए भगवान बुद्ध की तपस्थली

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विश्व की सबसे प्राचीन नगरी काशी से 10 किलोमीटर पर है सारनाथ। यह हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल तो है ही, बौद्ध धर्म के अनुनायियों के लिए यह सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश इसी जगह दिया था। तभी से इसे महाधर्म चक्र प्रवर्तन के नाम से जाना जाता है।

ऋषिकेश: इस योग नगरी में आप करेंगे असीम शांति का अनुभव

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ऋषिकेश का नाम आते ही जेहन में सबसे पहले योग नगरी की तस्वीर उभरने लगती है। यहां आने पर हर बार कुछ नया महसूस होता है। जीवन में एक ताजगी का एक झोंका असीम शांति का अनुभव कराने लगता है। ऋषिकेश को विश्व की योग राजधानी भी कहा जाता है। लोगों का मानना है कि यहां ध्यान लगाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां दुनिया भर से हर साल हजारों लोग योग, ध्यान और शांति की चाह में आते हैं।

कुतुब मीनार- ईंटों से बनी दुनिया की सबसे ऊंची मीनार

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दिल्ली के महरौली इलाके में बना 'कुतुब मीनार' ईंटों से बनी दुनिया की सबसे ऊंची मीनार है। दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक में 1192 में इसके निर्माण का काम शुरू करवाया था, लेकिन वह ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रहा और इस इमारत को पूरा बनते नहीं देख पाए। कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद उसके उत्तराधिकारियों इल्तुतमिश और फिरोज शाह तुगलक ने इसका निर्माण पूरा करवाया।

पटना: अखंड भारत को समझना है तो पाटलिपुत्र आना होगा

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पटना यानी पाटलिपुत्र... दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक। पाटलिपुत्र का गौरवशाली इतिहास रहा है। पाटलिपुत्र का इतिहास 600 ईसा पूर्व से भी पुराना है। पाटलिपुत्र हजारों साल तक कई महान सम्राटों की राजधानी रहा है। पटना अजातशत्रु, चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त द्वितीय, समुद्रगुप्त जैसे महान शासकों के अखंड भारत की अवधारणा को साकार करने के लिए जाना जाता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां प्रतिदिन शयन करने आते हैं भोलेनाथ महादेव

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हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है और ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में चौथा है। मध्यप्रदेश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर- ममलेश्वर महादेव के रूप में। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इंदौर से 77 किलोमीटर पर है। मान्यता है कि सूर्योदय से पहले नर्मदा नदी में स्नान कर ऊं के आकार में बने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

नीमराना फोर्ट (Neemrana Fort): वीकेंड पर लीजिए राजसी ठाट का आनंद

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दिल्ली के पास जयपुर हाइवे पर एक जगह है नीमराना। यह जगह अपने नीमराना फोर्ट के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यह राजस्थान के अलवर जिले में एक पहाड़ी ऐतिहासिक स्थल है। दिल्ली से सिर्फ 122 किलोमीटर पर स्थित नीमराना फोर्ट वीकेंड गुजारने वाले पर्यटकों के लिए पसंदीदा जगह है। दिल्ली और जयपुर से लोग यहां पहुंच कर राजसी ठाट का आनंद लेते हैं।

Mughal Garden: आप भी कर सकते हैं राष्ट्रपति भवन स्थित इस खूबसूरत उद्यान की सैर

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नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन दुनिया के सबसे खूबसूरत उद्यानों में से एक है। अगर आप प्रकृति और खूबसूरत फूलों को पसंद करते हैं तो कम से कम एक बार इस मुगल गार्डन को देखने एक बार जरूर जाना चाहिए। यह अपनी तरह का अकेला गार्डन है जहां आपको दुनियाभर के सैकड़ों सुंदर फूलों को देखने का मौका मिलेगा। यहां आपको देखने के लिए कई तरह के रंग-बिरंगे सुगंधित फूल के साथ सैकड़ों पेड़-पौधे और फव्वारे मिलेंगे।

Lucknow Tour: मुस्कुराइए की आप लखनऊ में हैं, अदब के इस शहर में कुछ दिन नवाब बन के तो देखिए

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को नवाबों का शहर कहा जाता है। अदब के इस शहर में आकर आप हमेशा के लिए यहां के होकर रह जाएंगे। लखनऊ को नजाकत और नफासत का शहर भी कहते हैं। यहां के खानपान के साथ आप 'पहले आप' 'पहले आप' के मुरीद बनकर रह जाएंगे। तहजीबों के इस शहर का रहन-सहन, पहनावा और खानपान सब कुछ काफी महीन है। यह यहां के लोगों को देश-दुनिया के अन्य हिस्सों से अलग करता है।

Kedarnath Dham: केदारनाथ धाम- जहां भोलेनाथ महादेव शिवशंकर करते हैं निवास

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केदारनाथ धाम हिंदुओं के सबसे पवित्र और प्राचीन तीर्थस्थलों में से एक है। हर हिंदू जीवन में कम से कम एक बार यहां बाबा केदारनाथ के दर्शन जरूर करना चाहता है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह सबसे ऊंचाई पर स्थित ज्योतिर्लिंग भी है। केदारनाथ हिमालय क्षेत्र के चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री तथा यमुनोत्री ) और पंच केदार (केदारनाथ, रूद्रनाथ, कल्पेश्वर, मध्येश्वर, तुंगनाथ) में से भी एक है।

Jantar Mantar: ज्ञान-विज्ञान में दिलचस्पी है तो जंतर-मंतर वेधशाला जरूर आएं

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जंतर-मंतर का नाम आते ही सबसे पहले जेहन में जो तस्वीर उभर कर सामने आती है, वो धरना-प्रदर्शन की होती है। यहां सालों भर किसी ना किसी चीज को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहता है। यहां एक साथ कई प्रदर्शन होते रहते हैं। जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगते रहते हैं। यहां ज्यादातर जाना भी इसी सिलसिले में होता है। लेकिन यह जंतर-मंतर का धरना-प्रदर्शन स्थल खगोलीय वेधशाला को लेकर प्रसिद्ध है।

Imphal Tour : प्राकृतिक अजूबों से भरा शहर इंफाल, जहां आपको एक बार तो जरूर जाना चाहिए

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मणिपुर की राजधानी इंफाल सच में भारत का एक मणि है। यह शहर प्राकृतिक अजूबों से भरा पड़ा है। प्रकृति की खूबसूरत छटा यहां हर जगह बिखरी हुई है। इंफाल एक ऐसा शहर है जहां जीवन में कम से कम एक बार सभी को जरूर आना चाहिए। पहाड़ों के बीच बसा यह शहर अपने प्राकृतिक गुफाओं, झीलों, चाय के बगानों, वन्यजीवों और पहाड़ी हरियाली के लिए मशहूर है।

Haridwar: हरि को पाना है तो हरिद्वार आना होगा

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हरिद्वार यानी हरि तक पहुंचने का द्वार। ईश्वर को जानना, समझना और पाना चाहते हैं तो आप जो यात्रा शुरू करेंगे उसकी शुरुआत हरिद्वार से होगी।  हरि को पाने का रास्ता आपको यहीं से मिलेगा। हरिद्वार से ही हिंदू धर्म के चार धाम- केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री की यात्रा शुरू होती है।

Ganga Arti Varanasi: गंगा आरती- जिसे देखने खुद देवता आते हैं काशी के घाट पर

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गंगा आरती का नाम आते ही अनायास काशी के 84 घाटों में से दशाश्वमेध घाट और ललिता घाट की याद आ जाती है। दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी काशी में गंगा घाट किनारे रोज शाम होने वाली गंगा आरती आपके जीवन को बदल कर रख देगी। भोलेनाथ महादेव के इस वाराणसी में दशाश्वमेध पर जब युवा पंडित गंगा आरती और गंगा मंत्र का उच्चारण करते हैं तो लगता है जैसे स्वर्ग भूमि पर उतर आया हो। गंगा आरती के दिव्य दृश्य को देखकर आपको लगेगा कि जीवन धन्य हो गया। गंगा आरती का ही एक दिव्य स्परूप है देव दीपावली। इस दिन पूरे वाराणसी में दिवाली मनाई जाती है। घाटों को शादी या किसी भव्य समारोह की तरह सजाया जाता है। पूरा शहर जगमग करता रहता है। देव दीपावली को श्रद्धालु गंगा नदी के पावन जल में लाखों दीये विसर्जित करते हैं। आरती के वक्त पूरे माहौल में धूप की एक अलग ही सुगंध फैल जाती है। आरती के समय मंत्रों की गूंज आपके दिल-दिमाग ही नहीं बल्कि आत्मा को भी झंकृत कर देती है। आम लोगों के साथ विदेशी पर्यटक भी गंगा आरती को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। गंगा आरती, देव दीपावली, गंगा घाट और भोलेनाथ की नगरी काशी सभी एक दूसरे के पूरक हैं। दुनिया का स...

Fatehpur Sikri: आगरा घूमने जा रहे हैं तो फतेहपुर सीकरी जरूर जाइएगा

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ताजमहल दुनिया भर में प्रेम के प्रतीक के रूप में मशहूर है। ताजमहल को देखने के लिए प्रतिदिन दुनिया भर से हजारों लोग आगरा आते हैं। ज्यादातर लोग ताजनगरी आने के बाद बस ताजमहल, आगरा का किला, जामा मस्जिद और यहां के बाग को देखकर या फिर यहां मार्केटिंग कर घर लौट जाते हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ताजमहल के अलावा आगरा के पास काफी कुछ देखने को है।

Ellora Caves: एलोरा की गुफाएं- यहां पत्थर भी गाते हैं गीत

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एलोरा की गुफाएं पहाड़ और चट्टानों को काटकर बनाई गई एक ऐसी जगह है जहां पत्थर भी गीत गाते हैं। यहां आकर आप पत्थरों को काटकर, तराशकर बनाई गई गुफाओं को देखकर भारतीय कारीगरी और वास्तुकला की अद्भुत दुनिया में खो जाएंगे।

दरभंगा एयरपोर्ट से मिथिला में पर्यटन को लगे पंख

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दरभंगा में एयरपोर्ट शुरू होने से मिथिलि में पर्यटन को पंख लग गए हैं। दरभंगा एयरपोर्ट उड़ान योजना के तहत देश में सबसे सफल एयरपोर्ट बन गया है। 8 नवंबर, 2020 को यहां से हवाई सेवा शुरू होने के पांच महीने से भी कम समय में 1 लाख 75 हजार से ज्यादा लोगों ने यात्रा की है। उड़ान योजना के तहत यह एक रिकॉर्ड है।

Corona काल में यात्रा: कहीं जाने से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान

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कोरोना का कहर जारी है। देशभर में कोरोना फिर से उफान पर है। रोज नए मामले सामने आ रहे हैं। कई इलाकों में फिर से लॉकडाउन लगाने की नौबत आ गई है। कोरोना के खौफ ने एक बार फिर लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर कर दिया है।

Birla Temple Delhi: बिरला मंदिर, दिल्ली- जहां जाति-धर्म के नाम पर नहीं होता किसी से कोई भेदभाव

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दिल वालों की दिल्ली में एक ऐसा मंदिर है जहां जाति-धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से विख्यात इस मंदिर को देश-दुनिया के लोग बिरला मंदिर के नाम से जानते हैं।

अद्भुत, अनुपम और अविस्मरणीय अनुभव करना चाहते हैं तो आपके पास है जन्नत की सैर का सुनहरा अवसर

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दुनिया में कुछ ऐसी चीजें हैं जिसे आप देखकर, सामने जाकर ही अनुभव कर सकते हैं। धरती का स्वर्ग कश्मीर भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप कुछ अद्भुत, अनुपम और अविस्मरणीय अनुभव करना चाहते हैं...इस धरती पर स्वर्ग को देखना चाहते हैं तो आपको कश्मीर जाना होगा।

आम लोगों के लिए खुला मुगल गार्डन, ऑनलाइन बुकिंग से मिलेगी एंट्री

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राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित मुगल गार्डन आम लोगों के लिए 13 फरवरी से खोल दिया गया है। आप सोमवार को छोड़कर 21 मार्च तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच मुगल गार्डन की सैर कर सकते हैं।

राष्ट्रपति भवन 6 फरवरी से फिर से आम लोगों के लिए खुला, आप भी घूम आइए

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राष्ट्रपति भवन को आम जनता के भ्रमण के लिए 6 फरवरी, 2021 से दोबारा खोल दिया गया है। कोरोना महामारी के कारण 13 मार्च, 2020 से ही आम जनता के लिए इसे बंद कर दिया गया था। यह शनिवार और रविवार (सरकारी छुट्टियों को छोड़कर) को आम जनता के लिए खुला रहेगा।

Bhangarh Tour: भूतों का गढ़: भानगढ़

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क्या वाकई में भूत होते हैं ? क्या वो दिखाई देते हैं ? क्या वो किसी रुप में खुद के होने का अहसास कराते हैं ? जो लोग भूत-प्रेतों में विश्वास करते हैं जाहिर है उनका जवाब हां में होगा । लेकिन नहीं मानने वाले इन बातों को हंसी में उड़ा देंगे । लेकिन भारत सरकार का पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उन लोगों में शामिल है जो इस धारणा में विश्वास करता है कि वास्तव में भूत होते हैं ।

Hanuman Temple Delhi: दिल्ली के इस मंदिर में तुलसीदास जी ने की थी हनुमान चालीसा की रचना

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दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित है प्राचीन हनुमान मंदिर। मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रहती है। हनुमान जयंती को भी यहां भारी भीड़ जुटती है। इस हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह महाभारत काल का मंदिर है और हस्तिनापुर से अलग इंद्रप्रस्थ बसाने के क्रम में ही पांडवों ने इस मंदिर को बनाया था।